लखीसराय: बिहार के उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव का लखीसराय दौरा प्रशासनिक एक्शन और सियासी संकेत—दोनों वजहों से चर्चा में आ गया। एक तरफ उन्होंने संग्रहालय का निरीक्षण कर विकास की रूपरेखा मांगी और राजस्व समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय विधायक सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की गैरमौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया।
भव्य स्वागत, गार्ड ऑफ ऑनर… फिर शुरू हुआ एक्शन
डिप्टी सीएम के लखीसराय पहुंचने पर जिला प्रशासन ने उनका भव्य स्वागत किया। जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार (IAS) और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने बुके देकर उनका अभिनंदन किया, जबकि उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
इसके बाद विजेंद्र प्रसाद यादव सीधे लखीसराय संग्रहालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्राचीन और ऐतिहासिक मूर्तियों का अवलोकन किया।
संग्रहालय में दिखा ‘डेवलपमेंट मोड’
सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार ने उन्हें संग्रहालय में संरक्षित दुर्लभ मूर्तियों और उनके ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी।
निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ने व्यवस्था की सराहना की, लेकिन साथ ही स्पष्ट निर्देश भी दिए—संग्रहालय के समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाकर जल्द भेजी जाए। उन्होंने अपने निजी सचिव को भी निर्देशित किया कि प्रस्ताव मिलते ही उस पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
राजस्व समीक्षा बैठक में सख्त तेवर
इसके बाद अतिथि गृह में आयोजित समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए।
बैठक में उन्होंने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी—वित्तीय वर्ष 2026-27 का राजस्व लक्ष्य हर हाल में पूरा करें, GST, VAT, विद्युत शुल्क समेत सभी करों की वसूली तेज करें, लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं एवं अंचल स्तर तक मॉनिटरिंग मजबूत करें।
भागलपुर प्रमंडल के विभिन्न जिलों के वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया।
अफसर लाइन में… पर मंत्री गायब!
जहां एक ओर पूरा प्रशासनिक अमला—DM, SP, DDC, ADM समेत सभी अधिकारी मौजूद रहे, वहीं सबसे बड़ा सवाल बना रहा—जिले के स्थानीय विधायक सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा आखिर कहां थे?
डिप्टी सीएम जैसे वरिष्ठ नेता के दौरे में उनकी गैरमौजूदगी ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया
यह पहली बार नहीं… पहले भी दिखी दूरी
जानकार बताते हैं कि यह पहला मौका नहीं है जब विजय सिन्हा किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम से दूर रहे हों। इससे पहले भी ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री सुनील कुमार के लखीसराय दौरे में वह नजर नहीं आए थे।
लगातार दो अहम मौकों पर अनुपस्थिति ने अब इसे सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि सियासी संकेत बना दिया है।
क्या NDA में ‘सब ठीक’ नहीं?
लखीसराय की राजनीति में अब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या स्थानीय स्तर पर NDA के नेताओं के बीच तालमेल की कमी है, क्या कोई अंदरूनी मतभेद उभर रहा है या फिर यह सिर्फ रणनीतिक दूरी है?
हालांकि किसी भी नेता की ओर से इस पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन खामोशी ने ही सवालों को और गहरा कर दिया है।
डिप्टी CM का मैसेज साफ—काम चाहिए, बहाना नहीं
विजेंद्र प्रसाद यादव ने अपने पूरे दौरे के दौरान यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता राजस्व वृद्धि, विकास और प्रशासनिक जवाबदेही है।
उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि लक्ष्य हासिल करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सियासत बनाम सिस्टम—कहानी दो धार की
लखीसराय का यह दौरा एक तरफ जहां सिस्टम की सख्ती को दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ सियासत की खामोशी भी बहुत कुछ कहती नजर आती है।
कृषि मंत्री विजय सिन्हा की गैरमौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ एक कार्यक्रम से दूरी है या फिर आने वाले समय की बड़ी राजनीतिक हलचल का संकेत?
अब सबकी नजर अगले कदम पर
फिलहाल लखीसराय में चर्चा गर्म है और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय सिन्हा इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे?
क्योंकि बिहार की राजनीति में अक्सर खामोशी ही सबसे बड़ा बयान होती है।
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