रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पतन का संकेत बताया है।
रोहिणी आचार्य ने कहा कि नेहा बोरा पर स्याही फेंकना महज एक युवा नेत्री के साथ किया गया दुर्व्यवहार नहीं है, बल्कि देशभर में अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों और युवाओं के संघर्ष पर हमला है। उन्होंने कहा कि असहमति का जवाब संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए, न कि किसी पर हमला कर या उसे अपमानित करके।
बताया जा रहा है कि छात्र आंदोलन के समर्थन में रांची में मार्च के दौरान नेहा बोरा पैदल जा रही थीं। इसी दौरान पीछे से आए एक युवक ने कथित तौर पर उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी देखी गई। इस घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में नेहा बोरा को युवाओं की आवाज बताते हुए कहा कि इस तरह की घटना से उनके संघर्ष और हौसले को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन में असहमति हो सकती है, लेकिन विरोध का तरीका लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चेहरे पर स्याही फेंकना विरोध का लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके मुताबिक, इस तरह की घटनाएं छात्रों और युवाओं को डराने तथा उनकी आवाज दबाने का प्रयास प्रतीत होती हैं। रोहिणी ने हमलावरों को नसीहत देते हुए कहा कि विरोध का जवाब विरोध से दिया जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत हमला किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
रोहिणी आचार्य ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र अपनी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे में सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और निष्पक्ष जांच के माध्यम से होना चाहिए। आंदोलनकारी छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है।
रोहिणी आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि असहमति की आवाज को दबाने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनके आंदोलन को केवल विरोध के रूप में देखने के बजाय उनकी शिकायतों की वजह समझने की जरूरत है।
नेहा बोरा पर हुए हमले के बाद रोहिणी आचार्य का यह बयान ऐसे समय आया है, जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
फिलहाल, स्याही फेंकने की घटना ने छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। रोहिणी आचार्य के बयान से साफ है कि विपक्षी खेमे ने इस घटना को छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है।
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