पटना: खेलों में पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। पाटलिपुत्र खेल परिसर में राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के सहयोग से खेल प्रशिक्षकों के लिए एक दिवसीय एंटी डोपिंग जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में बिहार के एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्रों, खेलो इंडिया स्माल सेंटर और राज्य उत्कृष्टता केंद्रों से जुड़े 100 से अधिक प्रशिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों को डोपिंग के खतरे, नियमों और खिलाड़ियों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई।
खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन देने पर जोर
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यक्रम अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षकों को डोपिंग से जुड़े नियमों और इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे अपने प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ियों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।
उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता का आधार केवल प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत होनी चाहिए, न कि प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल।
नाडा ने दी डोपिंग नियमों की जानकारी
कार्यशाला में राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. अंकुश गुप्ता ने प्रशिक्षकों को डोपिंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने प्रतिबंधित पदार्थों, अंतरराष्ट्रीय नियमों, जांच प्रक्रिया और डोपिंग के कारण खिलाड़ियों के करियर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया।
स्वच्छ खेल वातावरण बनाने की पहल
रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि नाडा खेलों में डोपिंग रोकने और स्वच्छ खेल वातावरण तैयार करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और खेल से जुड़े सभी लोगों को डोपिंग नियमों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षक अपने खिलाड़ियों को डोपिंग से दूर रहने के लिए प्रभावी तरीके से प्रेरित करेंगे।
कार्यशाला में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के निदेशक रविंद्र नाथ चौधरी, उपनिदेशक हिमांशु सिंह, क्रीड़ा कार्यपालक आनंदी कुमार, चंदन कुमार सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
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