सुपौल: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा को लेकर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नेपाल भेजी जा रही 100 हाई-फ्रीक्वेंसी वायरलेस वॉकी-टॉकी की खेप बरामद की है। सुपौल जिले के सीमावर्ती क्षेत्र स्थित नियोर बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) पर एसएसबी की 45वीं वाहिनी ने नियमित जांच के दौरान यह कार्रवाई की। मामले में नेपाल निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। बड़ी संख्या में वायरलेस उपकरण मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
एसएसबी अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर नियमित निगरानी अभियान के दौरान जवानों ने नेपाल की ओर जा रही एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन को रोका। तलाशी के दौरान वाहन की डिक्की से दो कार्टन बरामद किए गए। जांच करने पर कार्टन के अंदर 50 Baofeng Walkie-Talkie और 50 Baofeng Portable Two-Way Radio मिले। कुल मिलाकर 100 हाई-फ्रीक्वेंसी वायरलेस उपकरण बरामद किए गए।
नेपाल के सप्तरी निवासी चालक गिरफ्तार
बरामदगी के बाद एसएसबी ने वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान देवानंद मिश्रा, निवासी मोहनपुर, जिला सप्तरी (नेपाल) के रूप में हुई है।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इन वायरलेस उपकरणों को नेपाल पहुंचाने जा रहा था। इसके बदले उसे केवल एक हजार रुपये मिलने थे। हालांकि जांच के दौरान वह इन उपकरणों के परिवहन और इस्तेमाल से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
एसएसबी के अनुसार, ऐसे वायरलेस संचार उपकरणों के लिए डब्ल्यूपीसी (Wireless Planning & Coordination Wing) और ईटीए (Equipment Type Approval) जैसी जरूरी अनुमति की आवश्यकता होती है।
दिल्ली के चांदनी चौक से जुड़ा कनेक्शन
मामले की जांच के दौरान एसएसबी को वाहन से दिल्ली के चांदनी चौक स्थित महेश्वरी ट्रेडर्स की सेलर इनवॉइस और डिलीवरी स्लिप भी मिली है।
दस्तावेजों के अनुसार, वायरलेस उपकरणों की यह खेप कुनौली स्थित महावीर इलेक्ट्रॉनिक के नाम जारी की गई थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दिल्ली से खरीदे गए इन उपकरणों को सीमा तक कौन पहुंचा रहा था और नेपाल भेजने के पीछे असली उद्देश्य क्या था।
जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल
100 हाई-फ्रीक्वेंसी वायरलेस उपकरणों की बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां कई बिंदुओं पर जांच कर रही हैं।
- इतनी बड़ी संख्या में वायरलेस सेट नेपाल क्यों भेजे जा रहे थे?
- इन उपकरणों का अंतिम इस्तेमाल कहां होना था?
- खरीद से लेकर सीमा तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
- क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?
इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच एजेंसियां दस्तावेजों और आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
दिल्ली से पहुंची एजेंसियां भी कर रही पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जांच एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली से पहुंची जांच एजेंसियां भी पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।
हालांकि, अभी तक इस बरामदगी का किसी आतंकी संगठन या किसी आपराधिक गतिविधि से कोई आधिकारिक संबंध सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी मिला था वायरलेस सेट
गौरतलब है कि 21 जुलाई को भी इसी सीमा क्षेत्र में एसएसबी ने एक व्यक्ति के पास से एक वॉकी-टॉकी बरामद किया था। कुछ ही दिनों के भीतर बड़ी संख्या में वायरलेस उपकरणों की बरामदगी ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल एसएसबी और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में जुड़े लोगों और नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई हैं।
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