शेखपुरा: कभी-कभी बदलाव की सबसे बड़ी शुरुआत किसी बड़े शहर से नहीं, बल्कि एक छोटे से स्कूल के आंगन से होती है… और इस बार वही हुआ शेखपुरा में।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से मुरलीधर मुरारका हाई स्कूल में एक ऐसा अभियान शुरू हुआ, जो सिर्फ कार्यक्रम नहीं बल्कि एक ‘प्रतिज्ञा’ बन गया है—नशा मुक्त भारत की प्रतिज्ञा, जिसमें 10 करोड़ लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
दीप जलाकर शुरुआत हुई, लेकिन यह सिर्फ रस्म नहीं थी… यह उस रोशनी का प्रतीक था, जो युवाओं के जीवन से नशे के अंधेरे को हटाने का संकल्प लेकर आई है।
प्रिंसिपल शैलेंद्र कुमार ने साफ कहा—नशा सिर्फ व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है। इसलिए इस अभियान में बच्चों को सिर्फ पढ़ाया नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें सही दिशा भी दिखाई जाएगी।
कार्यक्रम में मेडिटेशन के जरिए युवाओं को अंदर से मजबूत बनाने की कोशिश हुई। ज्योति बहन ने राजयोग के जरिए मन को नियंत्रित करने की कला सिखाई, तो प्रियंका बहन ने बताया कि सकारात्मक सोच ही नशे से दूरी का सबसे आसान रास्ता है।
स्कूल की छात्राओं के स्वागत नृत्य ने माहौल को जीवंत बना दिया, वहीं हर व्यक्ति के माथे पर लगा तिलक इस बात का प्रतीक बन गया कि अब यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं—एक जनआंदोलन है।
6 अगस्त से 20 अगस्त तक चलने वाला यह अभियान शहर के हर कोने तक पहुंचेगा—स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और सार्वजनिक स्थानों पर रैलियां, सेमिनार और शपथ कार्यक्रम के जरिए।
अंत में जब सभी ने एक साथ हाथ उठाकर नशा मुक्त समाज की शपथ ली… तो वह पल सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत बन गया।
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