लखीसराय: कुछ कहानियां सिर्फ रिश्तों की नहीं होतीं, वे समाज को इंसानियत का आईना दिखाती हैं। ऐसी ही एक भावुक कहानी 25 जुलाई 2026 को लखीसराय के प्रसिद्ध बाबा अशोक धाम मंदिर परिसर में लिखी गई, जहां दो संघर्षों से गुजरे लोगों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जिंदगी की नई शुरुआत की।
आंखों की रोशनी भले ही दुल्हन फूलकांति कुमारी का साथ नहीं देती, लेकिन उसके दिल में बसे सपनों की रोशनी ने उसे जीवनसाथी तक पहुंचाया। वहीं, दिव्यांग राज कुमार ने भी अपनी चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए फूलकांति का हाथ थामा और साथ निभाने का वादा किया।
सात फेरों के इस पवित्र बंधन में सिर्फ दो लोग नहीं जुड़े, बल्कि दो उम्मीदें, दो संघर्ष और दो सपने एक साथ चल पड़े।
मुश्किलों के बीच खिला खुशियों का फूल
फूलकांति कुमारी के पिता स्वर्गीय विजयी पासवान थे। जीवन ने कई परीक्षाएं लीं, लेकिन परिवार और समाज के सहयोग ने उनके जीवन में खुशियों का नया अध्याय जोड़ दिया।
मुंगेर के घोरघाट निवासी राज कुमार के लिए भी यह पल किसी सपने से कम नहीं था। दोनों ने साबित कर दिया कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर साथ देने वाला हाथ मिल जाए तो हर रास्ता आसान हो जाता है।
समाजसेवियों ने निभाया परिवार का फर्ज
इस विवाह को संभव बनाने में पटेल संस्थान के अध्यक्ष अभिषेक पटेल और कोषाध्यक्ष कुलभूषण गिरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस विवाह की जिम्मेदारी उठाकर यह संदेश दिया कि समाज में संवेदनशीलता और सहयोग आज भी जिंदा है।
विवाह में बाबा अशोक धाम ट्रस्ट के सचिव डॉ. कुमार अमित का भी विशेष सहयोग रहा। दुल्हन का कन्यादान उसके भाई के ससुर एम.पी. पासवान ने किया।
आंखों में सपने, दिल में विश्वास
मंदिर परिसर में जब विवाह की रस्में पूरी हो रही थीं, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि उस विश्वास की जीत थी जो कहता है कि इंसान की पहचान उसकी कमी से नहीं, बल्कि उसके हौसले और दिल से होती है।
इस अनोखे विवाह ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया—रिश्ते शरीर की सीमाओं से नहीं, दिल की भावनाओं से बनते हैं।
बाबा अशोक धाम की पावन धरती पर शुरू हुई फूलकांति और राज कुमार की यह नई यात्रा आने वाले समय में उम्मीद और इंसानियत की मिसाल बनी रहेगी।
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