पाकुड़: जिला मुख्यालय समेत पूरे जिले में शुक्रवार को आस्था और परंपरा का प्रतीक घुरती रथयात्रा उत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान मदन मोहन को पूजा-अर्चना के बाद पीतल के रथ पर सवार कर नगर भ्रमण कराया गया और फिर उन्हें उनके मूल मंदिर में पुनः स्थापित किया गया।
रथयात्रा से पहले स्थानीय पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के बीच भगवान मदन मोहन की विशेष पूजा की। शुभ मुहूर्त में भगवान की प्रतिमा को पीतल के रथ में विराजमान कराया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यात्रा शुरू हुई।
जयकारों से गूंजा शहर
रथ यात्रा की शुरुआत कालीबाड़ी मैदान से हुई। इसके बाद यात्रा राजा पड़ा, इंदिरा चौक, बिरसा चौक, नगर थाना और भगत पाड़ा होते हुए निकली। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और जयकारे लगाए।
इसके बाद भगवान मदन मोहन की प्रतिमा को वापस कालीबाड़ी मैदान स्थित मंदिर में स्थापित किया गया। शाम को पुनः पूजा-अर्चना कर भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
सात दिन बाद हुई भगवान की वापसी
मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दिन भगवान मदन मोहन अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर गए थे। वहां सात दिनों तक उनका निवास और पूजा-अर्चना की गई।
घुरती रथयात्रा के अवसर पर भगवान की वापसी हुई और उन्हें फिर से अपने धाम यानी मंदिर में स्थापित किया गया।
रथ मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रथयात्रा के साथ आयोजित मेले में भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन के बाद मेले का आनंद लिया।
मेले में रथ मिठाई, जलेबी, कटहल और आम की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। बिरसा चौक से लेकर भगत पाड़ा तक पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल रहा।