रांची: झारखंड में वन संरक्षण और प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राज्य के सभी वन क्षेत्रों का टेक्निकल और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे एक क्लिक पर राज्य के किसी भी वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, संरचना और बदलाव की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके लिए वन क्षेत्रों के डिजिटल मैप तैयार करने और उनकी लेयरिंग करने का निर्देश दिया गया है।
सीएम ने कहा कि झारखंड गठन के बाद वन क्षेत्रों में कई बदलाव हुए हैं। कहीं जंगलों का विस्तार हुआ है तो कहीं खनन, विकास योजनाओं और अन्य गतिविधियों के कारण बदलाव आए हैं। ऐसे में वन क्षेत्रों का वैज्ञानिक और अपडेट डिजिटल दस्तावेज तैयार करना समय की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण के साथ-साथ उपयोगी पौधरोपण पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिर्फ पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पौधे लगाए जाएं।
उन्होंने महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर और अर्जुन जैसे पेड़ों के बड़े पैमाने पर रोपण की बात कही। इससे जैव विविधता को मजबूती मिलने के साथ-साथ ग्रामीणों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और वन विभाग व पर्यटन विभाग मिलकर बेहतर योजना के साथ काम करें।
उन्होंने ‘पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ’ योजना का प्रचार-प्रसार करने, वन पट्टा के लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने और काजू व बांस जैसी व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत विकास के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
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