लखीसराय: जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने मंगलवार को चानन, रामगढ़ चौक, पिपरिया और हलसी के राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर 15 जुलाई 2026 से अकादमिक सत्र शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा की। लेकिन इस बैठक ने व्यवस्था की पोल ही खोल दी।
राज्य सरकार द्वारा बिना आधारभूत संरचना वाले विद्यालयों को डिग्री कॉलेज का दर्जा देने के फैसले से अब समस्याएं खुलकर सामने आ रही हैं। न भवन पूरी तरह तैयार, न जरूरी संसाधन, और सबसे बड़ी बात—प्राध्यापक ही नदारद!
बैठक में प्राचार्यों ने साफ कहा कि आवश्यक सामग्री तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने जिला पदाधिकारी से कार्यादेश जारी करने और समय सीमा के भीतर व्यवस्थाएं पूरी कराने की मांग की। इस पर डीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 13 जुलाई तक हर हाल में सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध करा लिए जाएं, ताकि 15 जुलाई से क्लास शुरू हो सके।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे, जिस पर डीएम ने जिला परिवहन पदाधिकारी को “पिंक बस” की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि छात्र-छात्राओं की सुरक्षित आवाजाही हो सके।
वहीं, हर कॉलेज में एक-एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की मांग भी उठी। डीएम ने प्राचार्यों को निर्देश दिया कि वे जल्द अनुरोध पत्र दें, ताकि विश्वविद्यालय स्तर पर आगे की कार्रवाई हो सके।
लेकिन असली तस्वीर नामांकन के आंकड़ों ने बयां कर दी। प्रत्येक कॉलेज में 300 सीटें तय हैं, लेकिन नामांकन की स्थिति बेहद खराब है। कहीं 66, कहीं 44, कहीं 27 तो कहीं मात्र 24 छात्रों ने ही एडमिशन लिया है। सवाल यह उठता है कि जब न संसाधन हैं, न शिक्षक, तो छात्र क्यों आएंगे?
सबसे बड़ा सवाल:
क्या सिर्फ कागजों पर कॉलेज खोलकर शिक्षा का स्तर सुधरेगा, या यह सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह जाएगा?
बैठक में संबंधित पदाधिकारी और सभी कॉलेजों के प्राचार्य मौजूद रहे, लेकिन व्यवस्था सुधारने की असली चुनौती अब भी जस की तस है।
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