शेखपुरा: जिले में पेयजल संकट को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीपीआई के जिला सचिव प्रभात पांडेय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पीएचईडी कार्यालय पहुंचे और घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया और प्रभावित गांवों में जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग उठाई।
कई प्रखंडों में नल-जल और चापाकल खराब होने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान सीपीआई जिला सचिव प्रभात पांडेय ने आरोप लगाया कि जिले के अरियरी, चेवाड़ा, घाटकुसुंभा और शेखपुरा सदर प्रखंड समेत कई क्षेत्रों में नल-जल योजना और चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं। उनका कहना था कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
प्रभात पांडेय के मुताबिक, पेयजल व्यवस्था बाधित होने से दर्जनों गांवों और महादलित टोलों के लोग पानी की किल्लत झेलने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो पाने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
चापाकल मरम्मत में करोड़ों के घोटाले का आरोप
सीपीआई नेता ने पीएचईडी विभाग पर चापाकलों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई जगह नल-जल योजना के मोटर खराब हैं, जबकि कुछ इलाकों में लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभाग की ओर से इस मामले में क्या जवाब दिया गया, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दशहरा के दौरान भी पानी के लिए परेशान ग्रामीण
प्रभात पांडेय ने कहा कि जिले के दो दर्जन से अधिक गांवों और महादलित बस्तियों में पेयजल की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एक ओर लोग दशहरा का त्योहार मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई ग्रामीण पानी की व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सीपीआई ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि पेयजल संकट से प्रभावित गांवों और महादलित टोलों में तत्काल पानी की आपूर्ति बहाल की जाए। पार्टी ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और नल-जल योजनाओं को दुरुस्त करने की मांग भी उठाई।
प्रदर्शन के जरिए सीपीआई ने स्पष्ट किया कि पेयजल संकट का जल्द समाधान होना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े। अब देखना होगा कि प्रशासन और पीएचईडी विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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