शेखपुरा में रविवार का दिन बुजुर्गों के नाम रहा, जब जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम खुद जमीनी हकीकत जानने निकल पड़ी। आश्रय स्थल से लेकर वृद्धा आश्रम तक पहुंचकर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया, बल्कि वहां रह रहे बुजुर्गों से सीधा संवाद भी किया गया।
यह निरीक्षण बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना और प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी के निर्देश पर किया गया। टीम का नेतृत्व प्राधिकार के सचिव सुशील प्रसाद ने किया, जिन्होंने हर व्यवस्था को बारीकी से परखा।
सबसे पहले शेखपुरा बस स्टैंड के पास नगर परिषद द्वारा संचालित आश्रय स्थल का निरीक्षण हुआ। यहां रह रहे लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं—रहने, खाने और साफ-सफाई—को लेकर विस्तृत जांच की गई। इसके बाद टीम बरबीघा के समाचक मोहल्ले स्थित इंद्रा वृद्धा आश्रम पहुंची, जहां 22 बुजुर्ग निवास कर रहे हैं।
सचिव सुशील प्रसाद ने बुजुर्गों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और यह सुनिश्चित किया कि उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं। आश्रम में नियमित स्वास्थ्य जांच और देखभाल की व्यवस्था को भी परखा गया, जिसे संतोषजनक पाया गया।
निरीक्षण के साथ-साथ विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन भी किया गया। इस दौरान बुजुर्गों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई। अधिवक्ता उपेन्द्र प्रसाद, जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार और रवि कुमार ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।
यह पहल न सिर्फ व्यवस्थाओं की निगरानी तक सीमित रही, बल्कि बुजुर्गों के मनोबल को बढ़ाने का भी माध्यम बनी। अधिकारियों की मौजूदगी ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं, बल्कि सिस्टम उनकी देखभाल के लिए सजग है।
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