गया: बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को बोधगया में आयोजित ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक मंजूरी और निवेश से जुड़े आवेदनों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि संबंधित अधिकारी तय समयसीमा में आवेदन पर संज्ञान नहीं लेते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि बिहार में उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा और सरकारी स्तर पर होने वाली देरी को दूर करने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान गया जिले के डोभी प्रखंड में प्रस्तावित बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही परियोजना के लोगो और भूखंड आवंटन प्रक्रिया के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल की भी शुरुआत की गई।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए उद्योगपति, निवेशक और सरकारी अधिकारी शामिल हुए। निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
30 दिन में औद्योगिक मंजूरी पर कार्रवाई, अधिकारियों को चेतावनी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि सरकार औद्योगिक मंजूरी की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि तय समयसीमा में आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने तय कर दिया, सब काम 30 दिन के अंदर होगा। नहीं होगा तो पदाधिकारी निलंबित होंगे। 30 दिन में अगर अधिकारी आपके आवेदन पर संज्ञान नहीं लेते हैं, तो खुद-ब-खुद उस कार्य के लिए आपका काम हो जाएगा। आपके काम का लाइसेंस मिल जाएगा।”
इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और अनावश्यक देरी से राहत देना बताया गया। हालांकि, स्वतः मंजूरी की व्यवस्था किन सेवाओं पर लागू होगी और इसके विस्तृत नियम क्या होंगे, इसकी जानकारी आधिकारिक दिशानिर्देशों से स्पष्ट होगी।
डोभी में बनेगी इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी
बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 के आयोजन के दौरान गया जिले के डोभी प्रखंड में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी परियोजना को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इस परियोजना को बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर पेश किया गया।
कार्यक्रम में BIMCGL का लोगो जारी किया गया और भूखंड आवंटन के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य निवेशकों को एक व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से जरूरी सेवाएं और मंजूरियां उपलब्ध कराना है।
सरकार की योजना है कि निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए उपयुक्त जमीन और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच आसान हो। इससे औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और निवेश से जुड़े प्रस्तावों को जमीन पर उतारने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री बोले—बिहार गरीब प्रदेश नहीं था
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बिहार के आर्थिक इतिहास और औद्योगिक विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिहार कभी गरीब प्रदेश नहीं था, लेकिन समय के साथ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि यहां के कई उद्योगपति और कारोबारी दूसरे राज्यों तथा विदेशों में जाकर काम करने लगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अब बिहार में बदलते बुनियादी ढांचे और निवेश के अवसरों के कारण कारोबारी यहां लौटने में रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से बिहार में उद्योग लगाने और राज्य के विकास में भागीदार बनने की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य विकसित भारत का निर्माण करना है और बिहार को समृद्ध बनाने के लिए भी सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में उद्योगों के विस्तार के लिए सरकार विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से भी कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की योजना है।
सड़क और बिजली के बुनियादी ढांचे में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में सड़क और बिजली के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। उनके मुताबिक, अब पटना से राज्य के विभिन्न हिस्सों तक यात्रा करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
उन्होंने बिहार के बजट में हुई वृद्धि का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार का बजट करीब 6,000 करोड़ रुपये था और उस समय राजस्व का बड़ा हिस्सा वर्तमान झारखंड क्षेत्र से आता था। उन्होंने बताया कि बाद के वर्षों में बिहार का बजट बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचा।
मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों के जरिए राज्य की आर्थिक क्षमता में आए बदलाव को रेखांकित किया और निवेशकों से बिहार में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
बिहार में 12 टाउनशिप बनाने की योजना
मुख्यमंत्री ने राज्य में आधुनिक शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए 12 टाउनशिप विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गया में प्रस्तावित मगध टाउनशिप को इस तरह विकसित करने की परिकल्पना है कि उसमें भगवान बुद्ध और बौद्ध विरासत की झलक दिखाई दे।
सरकार की योजना के अनुसार, इन टाउनशिप में रहने, स्वास्थ्य, शिक्षा और आतिथ्य से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने जापान जैसे देशों के मानकों के अनुरूप टाउनशिप, होटल, अस्पताल और विद्यालय बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़कर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
गया से बैंकॉक और दुबई की कनेक्टिविटी पर जोर
बोधगया के अंतरराष्ट्रीय महत्व का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने हवाई संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने गया एयरपोर्ट से बैंकॉक के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू करने और दुबई के लिए भी सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही।
बोधगया भगवान बुद्ध से जुड़ा प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है और यहां हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से पर्यटन, आतिथ्य क्षेत्र और स्थानीय कारोबार को लाभ मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक विरासत राज्य को विशिष्ट पहचान देती है। निवेशकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
फरवरी तक 20 लाख एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने निवेशकों के लिए जमीन की उपलब्धता को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि फरवरी तक 20 लाख एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को उनकी जरूरत के मुताबिक जमीन मुहैया कराने की दिशा में काम किया जा सके।
उन्होंने फरवरी में देश और दुनिया के उद्योगपतियों की भागीदारी वाला एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी कही। सरकार का उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाना और उद्योगों के लिए भूमि की उपलब्धता से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।
हालांकि, 20 लाख एकड़ भूमि के लक्ष्य के तहत किस प्रकार की जमीन शामिल होगी और उसे किस प्रक्रिया से आवंटित किया जाएगा, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही योजना का दायरा स्पष्ट होगा।
बिहार में खुलेगा NRI सेंटर
मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रहने वाले प्रवासियों और अनिवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बिहार में एनआरआई सेंटर खोला जाएगा, ताकि बाहर रहने वाले बिहारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यवस्था उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मुख्य सचिव को इस संबंध में निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बाहर जाकर मजदूरी करने वाले करीब 12 लाख लोगों को अगले पांच वर्षों में बिहार वापस लाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
इस घोषणा के तहत रोजगार, उद्योग और आर्थिक अवसरों के विस्तार की भूमिका अहम होगी। हालांकि, प्रवासी श्रमिकों की वापसी के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और क्रियान्वयन की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने निवेशकों से की अपील
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी निवेशकों से बिहार में उद्योग लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थापना से रोजगार और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
मांझी ने कहा कि बिहार का विकास तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब यहां औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और उद्यमियों को अवसर मिलेंगे। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाने की बात कही कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सहयोग किया जाएगा।
उन्होंने फल्गु और निरंजना नदियों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उद्योगों और शहरी विकास के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम किया जा रहा है।
50 देशों से ऑनलाइन जुड़े बिहार फाउंडेशन के प्रतिनिधि
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने बताया कि बिहार फाउंडेशन के प्रतिनिधि 50 देशों से ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने इसे राज्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि सड़क संपर्क और दूसरी सुविधाओं में सुधार के कारण निवेशकों की रुचि बढ़ रही है।
विजय चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार उन नीतियों और प्रयासों को आगे बढ़ा रही है।
कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार में निवेश के अवसरों को सामने लाना, उद्योगपतियों से संवाद करना और औद्योगिक परियोजनाओं को गति देना रहा।
निवेश और रोजगार पर टिकी निगाहें
बोधगया में आयोजित बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 कार्यक्रम में औद्योगिक मंजूरी के लिए 30 दिनों की समयसीमा, डोभी में मैन्युफैक्चरिंग सिटी, आधुनिक टाउनशिप, भूमि उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई मुद्दे सामने आए।
अब इन घोषणाओं का वास्तविक असर उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। निवेशकों को समय पर मंजूरी, जमीन, बिजली, पानी, परिवहन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो इससे उद्योगों के विस्तार और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं पर होने वाली प्रगति और घोषित समयसीमाओं का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।