लखीसराय: बच्चों का बचपन सुरक्षित रहे, वे अपने अधिकारों को पहचानें और किसी भी असहज परिस्थिति में बिना डरे अपनी बात रख सकें—इसी उद्देश्य से मंगलवार को लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को POCSO अधिनियम-2012, गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को समझाया गया कि सुरक्षा से जुड़ी किसी भी परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते भरोसेमंद व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।
बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीजेएम शिप्रा कुमारी और पैनल अधिवक्ता दिवाकर पांडे ने विद्यार्थियों को POCSO अधिनियम-2012 के प्रावधानों और महत्व के बारे में विस्तार से बताया। वक्ताओं ने सरल भाषा में समझाया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है। बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना और जरूरत के समय सहायता मांगने का तरीका जानना बेहद जरूरी है।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे अपनी परेशानी खुलकर बता सकें और उनकी बात को गंभीरता से सुना जाए।

गुड टच-बैड टच की जानकारी देकर समझाई सतर्कता
जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाया गया। उन्हें बताया गया कि यदि किसी का व्यवहार असहज लगे या कोई अनुचित हरकत करे, तो उसे नजरअंदाज करने अथवा डरकर चुप रहने के बजाय अपने अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।
बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी परेशानी के बारे में बताने में शर्म या झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए। समय पर अपनी बात रखना और मदद मांगना उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना भी रहा।
इंटरनेट की दुनिया में भी सुरक्षा जरूरी
आज बच्चे पढ़ाई, जानकारी और मनोरंजन के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में साइबर सेल के पुलिस प्रतिनिधि ने विद्यार्थियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए।
उन्हें निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने और इंटरनेट पर किसी संदिग्ध गतिविधि या परेशानी का सामना होने पर जिम्मेदार व्यक्ति को जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
जरूरत पड़ने पर इन हेल्पलाइन नंबरों से लें मदद
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सहायता के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किसी परेशानी की स्थिति में सही सहायता तक पहुंचना जरूरी है।
- 1098 — चाइल्ड हेल्पलाइन: बच्चों से जुड़ी सहायता और सुरक्षा के लिए।
- 181 — महिला हेल्पलाइन: महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए।
- 112 — आपातकालीन सहायता: आपात स्थिति में मदद के लिए।
इन नंबरों की जानकारी देकर विद्यार्थियों को जरूरत के समय सहायता लेने के प्रति जागरूक किया गया।
कानून की जानकारी के साथ भरोसे का माहौल बनाना भी जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बच्चों को कानून की जानकारी देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि वे अपनी परेशानी बिना डर के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बता सकें। परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण है।
‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें, किसी असहज स्थिति को अनदेखा न करें और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगने में संकोच न करें।
अतिथियों का स्वागत, शिक्षिका ने किया कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अमित कुमार ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व विद्यालय की शिक्षिका रश्मि डे ने किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एसडीजेएम शिप्रा कुमारी, पैनल अधिवक्ता दिवाकर पांडे, साइबर सेल के पुलिस प्रतिनिधि, बाल कल्याण समिति (CWC) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के प्रतिनिधि तथा पीएलवी सुप्रिया कुमारी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्राचार्य, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों सहित सभी शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा।
जागरूकता से ही मजबूत होगी बच्चों की सुरक्षा
केंद्रीय विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता के प्रति जागरूक करने की पहल रहा। इसका मुख्य संदेश स्पष्ट था—बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग बनाना, उन्हें सही जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
सुरक्षित बचपन की नींव जागरूकता, भरोसे और समय पर मिलने वाली सहायता से मजबूत होती है। बच्चों को अपनी बात कहने का भरोसा देना और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही ऐसे अभियानों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
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