चीन: दुनिया में आस्था और परंपराओं के कई अनोखे रंग देखने को मिलते हैं। चीन के एक गांव में ऐसी ही एक परंपरा है, जहां कुत्ते को पालकी में बैठाकर पूरे गांव में घुमाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। इस दौरान कुत्ते को पारंपरिक कपड़े, बाघ के चेहरे जैसी टोपी और चांदी का पट्टा पहनाया जाता है। ढोल की थाप, पारंपरिक मंत्र और ग्रामीणों के नाच-गाने के बीच यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं होता।
पालकी में बैठता है कुत्ता, पूरे गांव में निकलता है जुलूस
यह अनोखी परंपरा चीन के गुइझोउ प्रांत के जियाओबांग गांव में निभाई जाती है। चीनी चंद्र कैलेंडर के सातवें महीने में आयोजित होने वाले इस अनुष्ठान में चुने गए कुत्ते को बांस की पालकी पर बैठाया जाता है। इसके बाद ग्रामीण उसे पूरे गांव में घुमाते हैं। एक पुजारी पारंपरिक मंत्रों का पाठ करता है और लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल होते हैं।
खेतों में ढोल-नगाड़े, नाच और कीचड़ की रस्म
जुलूस जब खेतों तक पहुंचता है, तो उत्सव का रंग और गहरा हो जाता है। लोग ढोल बजाते हैं, नाचते हैं और एक-दूसरे पर कीचड़ लगाते हैं। इन रस्मों के पीछे अच्छी बारिश होने और खेतों में भरपूर फसल पैदा होने की कामना जुड़ी है। ग्रामीणों के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और खेती से जुड़ी आस्था का प्रतीक भी है।
आखिर कुत्ते को ही क्यों मिलता है इतना सम्मान?
मियाओ समुदाय के लोगों की मान्यताओं में कुत्ते को जीवन बचाने वाला माना जाता है। इस परंपरा से जुड़ी एक लोककथा के अनुसार, गांव में भीषण सूखा पड़ने पर एक देवता ने बुजुर्ग को सपने में कुत्ते के साथ प्रार्थना करने का संकेत दिया था। मान्यता है कि इसके बाद बारिश हुई और लोगों को राहत मिली।
एक दूसरी कहानी के मुताबिक, कुत्ते ने पूर्वजों को पानी का छिपा हुआ स्रोत खोजने में मदद की थी। इन्हीं मान्यताओं के कारण कुत्ते को सम्मान देने की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
आस्था, प्रकृति और लोककथा का अनोखा संगम
कुत्ते को पालकी में बैठाकर पूजा करना, उसके लिए विशेष वस्त्र पहनाना और बारिश की कामना के साथ खेतों में उत्सव मनाना इस परंपरा को दुनिया की अनोखी सांस्कृतिक रस्मों में शामिल करता है। यह आयोजन दिखाता है कि अलग-अलग समाजों में जानवरों के प्रति सम्मान और प्रकृति से जुड़ी आस्थाएं कितने अलग-अलग रूप ले सकती हैं।
एक कुत्ता, चांदी का पट्टा, बांस की पालकी और बारिश की प्रार्थना—चीन के इस गांव की परंपरा अपने आप में हैरान करने वाली है।
ये खबर भी पढ़े: एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार का सिर धड़ से अलग कर देती; VIP प्रवक्ता वीणा भारती के बयान से सियासी भूचाल!