पटना: पटना हाईकोर्ट ने चुनावी हलफनामे में कथित गलत जानकारी देने के आरोप में एक साथ 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इनमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और राजद विधायक चेतन आनंद सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
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यह नोटिस हारे हुए प्रत्याशियों द्वारा दायर चुनाव याचिकाओं पर जारी किया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित विधायकों ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथ पत्र (एफिडेविट) में अपनी संपत्ति, आपराधिक मामलों और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी सही तरीके से प्रस्तुत नहीं की।
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कोर्ट ने जनवरी में पहली बार नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा था। अब दोबारा नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस एसबीपी सिंह की एकलपीठ कर रही है।
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संविधान के अनुच्छेद 329(b) के तहत चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर अदालत को आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर लगते हैं, तो दस्तावेजों की जांच, गवाहों की सुनवाई या चुनाव आयोग से रिपोर्ट मंगाई जा सकती है।
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कानूनी जानकारों के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 100 के तहत यदि यह साबित हो जाए कि उम्मीदवार ने जानबूझकर गलत जानकारी दी या भ्रष्ट आचरण किया, तो चुनाव रद्द किया जा सकता है। वहीं धारा 125A के तहत गलत हलफनामा देने पर छह महीने तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी त्रुटि या मामूली जानकारी छूट जाने से सदस्यता जाना तय नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मतदाता को उम्मीदवार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलनी चाहिए, लेकिन हर छोटी वस्तु या सामान्य विवरण का उल्लेख अनिवार्य नहीं है।
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अब सभी की नजर विधायकों के जवाब और अदालत की आगे की सुनवाई पर टिकी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो कानूनी कार्रवाई संभव है, लेकिन फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है।