पटना: बिहार की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। 19 अगस्त को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रस्तावित राजभवन मार्च से पहले पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि तेजस्वी यादव राजनीति सीखना चाहते हैं तो उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव से सीखना चाहिए। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी “कुंभकर्ण की नींद” में रहना पसंद करते हैं।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि नई पीढ़ी की राजनीति पुराने तौर-तरीकों से अलग है और अब जनता केवल राजनीतिक नारों या एजेंडों से प्रभावित नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी के आने के बाद राजनीति का चरित्र बदल चुका है।
अब नहीं चलेगी पुरानी राजनीति
पप्पू यादव ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जवाबदेही और परिणाम चाहती है। ऐसे में सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों और विरोध मार्च के सहारे जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब नेताओं के कामकाज का मूल्यांकन कर रही है और पुराने राजनीतिक फार्मूले धीरे-धीरे अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।
राहुल और अखिलेश का दिया उदाहरण
सांसद ने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव लगातार जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित कर रहे हैं और नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। उन्होंने संकेतों में तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सीखने की इच्छा रखने वाले नेता आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी सीमाओं में ही रह जाते हैं।
शराबबंदी पर भी साधा निशाना
पप्पू यादव ने बिहार की शराबबंदी नीति को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ और राज्य में नशे का कारोबार लगातार बढ़ा है। उनका आरोप था कि अपराध और भ्रष्टाचार भी बढ़े हैं, जबकि आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरा
सांसद ने राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी योजनाओं और खरीद प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
पप्पू यादव के इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजद की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
राजभवन मार्च से पहले विपक्षी खेमे के भीतर बढ़ी यह बयानबाजी बिहार की राजनीति को और अधिक गर्माने के संकेत दे रही है।
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