बिहार की राजनीति में इन दिनों दही–चूड़ा सिर्फ़ परंपरा नहीं, बल्कि संदेश बन गया है। शुक्रवार को इसी संदेश को और गहरा करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने पटना में दो जगह सियासी भोज देकर सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक आयोजन था, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहीं।
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पहला दही–चूड़ा भोज पटना न्यू क्लब में आयोजित हुआ। यहां माहौल तब और दिलचस्प हो गया जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोम) के नाराज माने जा रहे विधायक रामेश्वर महतो और आलोक सिंह भी भोज में नजर आए। दोनों विधायकों की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी और यह सवाल उठने लगे कि क्या आने वाले दिनों में सियासी समीकरण बदलने वाले हैं।
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इसके कुछ ही घंटों बाद नितिन नबीन ने अपने मंत्री आवास पर दूसरा भोज आयोजित किया। खास बात यह रही कि इस भोज के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया था। बेतिया में एक कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री सीधे मंत्री आवास पहुंचे और दही–चूड़ा भोज में शामिल हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन को और ज्यादा राजनीतिक वजन दे दिया।
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दो अलग-अलग जगहों पर हुए भोज, अलग-अलग संदेश देते नजर आए। एक ओर संगठन और सहयोगी दलों को साधने की कोशिश, तो दूसरी ओर सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के साथ संवाद का स्पष्ट संकेत। सियासी जानकार मानते हैं कि यह भोज सिर्फ़ खानपान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की बुनियाद भी हो सकता है।
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कुल मिलाकर, नितिन नबीन का यह सियासी भोज बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की आहट देता दिख रहा है—जहां दही–चूड़ा के साथ रणनीति भी परोसी गई।