शेखपुरा: अरियरी प्रखंड के छोटे से गांव तेलडीह की गलियों में आज खुशी की अलग ही चमक है। वजह है नेहा कुमारी—एक ऐसी बेटी, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को उड़ान दी और 95% अंक (475/500) हासिल कर सबको गर्व महसूस कराया।
नेहा की कहानी सिर्फ नंबरों की नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सपनों की है। पिता गोविन्द महतो मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, वहीं मां सावित्री देवी घर संभालती हैं। आर्थिक तंगी के बीच भी नेहा ने हार नहीं मानी—न कोचिंग, न महंगे संसाधन… सिर्फ self study और अटूट विश्वास।
उच्च विद्यालय ऐफनी, शेखपुरा +2 की छात्रा नेहा ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती।
नेहा कहती हैं, “मेरे माता-पिता और गुरुओं ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”
नेहा का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। वह चाहती हैं कि भविष्य में लोगों की सेवा करें और समाज में बदलाव लाएं।
आज तेलडीह गांव में हर कोई नेहा की तारीफ कर रहा है। कोई उसे “गांव की शान” कह रहा है, तो कोई “नई पीढ़ी की मिसाल”।
यह कहानी बताती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो हालात चाहे जैसे भी हों—मंजिल मिल ही जाती है।
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