मुजफ्फरपुर: बिहार में एक ओर सरकार शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और कथित शराब माफियाओं की नजदीकियों का मामला सामने आने से व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुजफ्फरपुर जिले के औराई थाना में डायल-112 पर तैनात सहायक अवर निरीक्षक (ASI) विपिन सिंह को एक कथित शराब कारोबारी के साथ डांस करना भारी पड़ गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और जांच के बाद ASI को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
वायरल वीडियो ने खोली पोल
बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें ASI विपिन सिंह एक व्यक्ति के साथ नाचते दिखाई दे रहे थे। वीडियो सामने आते ही लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर एक पुलिस अधिकारी का ऐसे व्यक्ति के साथ इतना करीबी संबंध कैसे हो सकता है, जिस पर शराब कारोबार से जुड़े मामले दर्ज हों।
मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस विभाग ने जांच शुरू कराई।
जांच में सामने आया शराब कारोबारी का नाम
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पूर्वी-1) द्वारा कराई गई जांच में वीडियो में मौजूद दूसरे व्यक्ति की पहचान दिलचंद राय के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दिलचंद राय औराई थाना क्षेत्र का निवासी है और उसके खिलाफ शराब बरामदगी से जुड़े तीन मामले दर्ज हैं।
जांच रिपोर्ट में यह माना गया कि एक पुलिस अधिकारी का ऐसे आरोपित व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से मेलजोल विभागीय अनुशासन और पुलिस सेवा की गरिमा के खिलाफ है।
SSP ने दिखाई सख्ती
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने ASI विपिन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि शराब कारोबार से जुड़े आरोपित व्यक्ति के साथ संपर्क और अनावश्यक मेलजोल पुलिस अधिकारी के संदिग्ध एवं अनुशासनहीन आचरण को दर्शाता है।
शराबबंदी की हकीकत पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर लगातार बहस चल रही है। विपक्ष पहले से ही पुलिस और शराब माफियाओं की कथित सांठगांठ के आरोप लगाता रहा है। ऐसे में एक पुलिस अधिकारी का कथित शराब कारोबारी के साथ वायरल वीडियो सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया है, लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि शराबबंदी लागू कराने वाली एजेंसियों के भीतर कहीं न कहीं जवाबदेही और निगरानी की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
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