मुंगेर: मुफस्सिल थाना से गिट्टी लदा जब्त 18 चक्का ट्रक गायब होने का मामला अब महज एक वाहन के लापता होने तक सीमित नहीं रहा है। खनन विभाग की रिसीविंग और थाना पुलिस के बयान में अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सैयद इमरान मसूद ने जांच के लिए मुख्यालय डीएसपी अर्जुन कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की है। टीम को तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
एक तरफ रिसीविंग, दूसरी तरफ ‘जानकारी नहीं’
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जब्ती सूची को लेकर है। खनन विभाग के अनुसार, तीन जुलाई को गिट्टी लदा ट्रक जब्त कर मुफस्सिल थाना को सौंपा गया था। खनन निरीक्षक मोहम्मद अरमान ने जब्ती सूची थाना में दी थी और विभाग के मुताबिक पीटीसी धनंजय कुमार ने उसकी रिसीविंग भी की थी।
खनन विभाग ने अब यही रिसीविंग एसपी के सामने पेश कर दी है।
लेकिन दूसरी तरफ थाना पुलिस का कहना है कि जब्ती सूची रिसीव किए जाने की थानाध्यक्ष को जानकारी नहीं थी। इससे पूरे मामले में ‘किसका दावा सही है?’ यह सवाल खड़ा हो गया है।
थाना के बाहर खड़ा था या पुलिस के कब्जे में?
इससे पहले पुलिस की ओर से कहा गया था कि खनन विभाग के अधिकारी जब्त ट्रक को थाना के बाहर एफएसएल बिल्डिंग के पास खड़ा करके चले गए थे। पुलिस के अनुसार, न तो थाना को इसकी जानकारी दी गई और न ही जब्ती सूची सौंपी गई।
अब जब खनन विभाग ने दस्तावेज के साथ रिसीविंग प्रस्तुत की है, तो पुलिस के इस पुराने दावे की भी जांच होगी।
तीन दिन में खुलेगा ‘ट्रक गायब’ होने का राज
एसपी ने पूरे मामले को गंभीर लापरवाही माना है। जांच टीम अब यह पता लगाएगी कि ट्रक वास्तव में कहां खड़ा था, उसकी निगरानी किसके जिम्मे थी, वाहन को वहां से कौन ले गया और जब्ती सूची की रिसीविंग किस परिस्थिति में हुई।
एसपी ने साफ कर दिया है कि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। सवाल सिर्फ एक है—जिस ट्रक को पुलिस की निगरानी में होना चाहिए था, आखिर वह बिना किसी को खबर हुए थाना क्षेत्र से बाहर कैसे चला गया?
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