कटिहार: कोढ़ा प्रखंड की रौतारा पंचायत से सामने आई तस्वीर सिस्टम पर सीधे सवाल खड़े करती है। यहां छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के लिए रोज अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। रेलवे ट्रैक पार करना तो आम बात है, लेकिन कई बार ये मासूम खड़ी ट्रेन के नीचे से निकलकर स्कूल पहुंचते हैं।
फुटओवरब्रिज बना, लेकिन रास्ता बेकार—जिम्मेदार कौन?
हैरानी की बात यह है कि रौतारा रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज तो बना है, लेकिन उससे जुड़ने वाली सड़क इतनी बदहाल है कि उसका इस्तेमाल करना मुश्किल है। दूसरी ओर रेलवे फाटक का रास्ता इतना दूर है कि बच्चे और ग्रामीण शॉर्टकट अपनाने को मजबूर हैं।
ये लापरवाही नहीं, मजबूरी है”
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत की बड़ी आबादी रेलवे लाइन के उस पार रहती है, जबकि स्कूल और मुख्य सड़क दूसरी तरफ हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि आबादी वाले हिस्से में कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है। ऐसे में बच्चों के पास जान जोखिम में डालकर पढ़ने जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
ट्रेन के नीचे से निकलते बच्चे—किस हादसे का इंतजार?
सबसे डराने वाली तस्वीर तब सामने आती है जब स्टेशन पर ट्रेन खड़ी रहती है और बच्चे उसके नीचे से निकलकर दूसरी तरफ जाते हैं। यह दृश्य न सिर्फ खतरनाक है बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी को भी उजागर करता है।
ग्रामीणों का गुस्सा—“कब जागेगा प्रशासन?”
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनकी मांग है कि आबादी वाले इलाके में जल्द से जल्द प्राथमिक विद्यालय खोला जाए।
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