रांची: झारखंड में कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात होमगार्ड जवान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण हजारों जवानों के घरों में चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है। सबसे खराब स्थिति स्वास्थ्य विभाग में तैनात जवानों की बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में तैनात करीब 3000 होमगार्ड जवानों को 5 से 16 महीने तक मानदेय नहीं मिला है। वहीं अन्य विभागों में कार्यरत 555 जवानों को 4-5 महीने से भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा लगभग 10 हजार जवानों को निकाय चुनाव और रामनवमी-मुहर्रम ड्यूटी का भुगतान भी अब तक नहीं मिला।
धमकी के बाद हरकत में आया विभाग
स्थिति की गंभीरता तब सामने आई जब जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में तैनात एक महिला होमगार्ड जवान फूल कुमारी ड्यूटी के दौरान फूट-फूटकर रो पड़ीं और बकाया भुगतान नहीं होने पर आत्महत्या की चेतावनी दे दी। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और 65.21 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
उधार के सहारे चल रहा घर
दुमका सदर अस्पताल में तैनात जवान दिनेश हांसदा पिछले 16 महीने से मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। परिवार में बीमार माता-पिता हैं, लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। उधार लेकर किसी तरह घर चल रहा है और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी तरह दुमका के ही जितेंद्र कुमार को 11 महीने से मानदेय नहीं मिला है। उनके परिवार की हालत इतनी खराब है कि अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई भी फीस के अभाव में रुकने के कगार पर है।
विभागवार बकाया की स्थिति
- स्वास्थ्य विभाग: 3000 जवान (5-16 महीने बकाया)
- बीएसएनएल: 300 जवान (4 महीने)
- सीसीएल: 200 जवान (अप्रैल से बकाया)
- पर्वत कोल ब्लॉक: 30 जवान (अप्रैल से)
- वन विभाग: 16 जवान (अप्रैल से)
- बीआईटी सिंदरी: 9 जवान (अप्रैल से)
अधिकारियों का पक्ष
गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा के डीआईजी मो. अर्शी ने कहा कि केवल जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में ही भुगतान लंबित है, क्योंकि वहां भुगतान की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की है। अन्य जगहों पर बकाया की जानकारी नहीं है।
एसोसिएशन की चेतावनी
झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने इस स्थिति को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है। एसोसिएशन के महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो जवान अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे।
झारखंड में होमगार्ड जवानों की यह स्थिति सरकार और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जो जवान दिन-रात जनता की सेवा में लगे हैं, वही आज अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि आवंटित राशि से कब तक उनकी समस्या का समाधान हो पाता है।
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