जमशेदपुर। झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्य शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस पर शनिवार को जमशेदपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उलियान स्थित निर्मल महतो के समाधि स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने शहीद निर्मल महतो को नमन करते हुए कहा कि उनके सपनों का झारखंड बनाना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि निर्मल महतो ने जिस झारखंड के लिए संघर्ष किया, उस सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी पर है। जब तक सूरज-चांद रहेगा, निर्मल महतो का नाम और उनका संघर्ष लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की अलग पहचान और अलग राज्य के निर्माण में निर्मल महतो समेत अनगिनत आंदोलनकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन लोगों ने आदिवासी और मूलवासी समाज को एकजुट कर अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। वर्षों के आंदोलन और बलिदान के बाद वर्ष 2000 में झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड वीरों और आंदोलनकारियों की धरती है। यहां के लोगों ने हमेशा एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग राज्य बनने के बाद लंबे समय तक झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज के हितों की अनदेखी की गई। इसके कारण लोगों को भय, शोषण और उपेक्षा का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्य की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई जारी रखी। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संघर्ष के कई दौर देखे हैं। जनता के समर्थन से झामुमो को एक बार फिर राज्य को नई दिशा देने का अवसर मिला है।
हेमंत सोरेन ने विरोधी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें राज्य सरकार के विकास कार्यों में बाधा डालने और झारखंड की एकता को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि झामुमो संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटा और राज्य के अधिकार, सम्मान तथा विकास के लिए आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार झारखंड की जरूरतों और यहां के जनमानस के अनुरूप राज्य की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है। तमाम चुनौतियों के बावजूद सरकार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है और झारखंड को बेहतर दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झामुमो के वरिष्ठ नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वह शहीद निर्मल महतो की समाधि पर शीश झुकाने आए हैं। उन्होंने कहा कि निर्मल महतो आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और आदर्श आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं।
शहादत दिवस पर उलियान स्थित समाधि स्थल के अलावा बिष्टुपुर चमरिया गेस्ट हाउस के पास स्थित निर्मल महतो की प्रतिमा पर भी लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में ईचागढ़ विधायक सविता महतो, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के प्रदेश अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता समेत झामुमो के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कौन थे निर्मल महतो
निर्मल महतो झारखंड अलग राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1950 को जमशेदपुर के कदमा-उलियान क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने शिबू सोरेन के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा को मजबूत करने और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की आवाज बुलंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
8 अगस्त 1987 को बिष्टुपुर स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के पास उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद हर वर्ष 8 अगस्त को उनके शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन झारखंड में बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देकर उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हैं।
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