रांची: झारखंड में छात्र आंदोलन का मुद्दा सुलझने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब नए खनिज कानून को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ‘खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ का लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी स्तर पर विरोध करने का ऐलान किया है।
रांची में झामुमो की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक के बाद हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर राज्यों को भरोसे में लिए बिना कानून में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों का असर झारखंड के आदिवासी, दलित, गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ सकता है।
‘नुकसान की भरपाई कौन करेगा?’
हेमंत सोरेन ने सवाल उठाया कि नए बदलावों से यदि राज्यों को भारी आर्थिक नुकसान होता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ विचार-विमर्श करके आगे बढ़ना चाहिए था।
मुख्यमंत्री ने झारखंड के पुराने बकाये का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक राज्य सरकार ने कोयला कंपनियों से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का दावा केंद्र के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि जब पुराने बकाये का भुगतान नहीं हुआ है तो नए बदलावों से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई को लेकर भी चिंता स्वाभाविक है।
संसद से पारित हो चुका है विधेयक
संसद ने 13 अगस्त को खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार इस कानून का हर लोकतांत्रिक और कानूनी मंच पर विरोध करेगी।
उनका आरोप है कि नए प्रावधान राज्यों के खनिज अधिकार और खनिज संपदा से जुड़े राजस्व अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने केंद्र से इस कानून पर पुनर्विचार करने की मांग भी की है।
झारखंड के लिए क्यों अहम है खनिज कानून?
झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है। कोयला समेत कई खनिज संसाधन राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में खनिजों से जुड़े अधिकार, कर और राजस्व व्यवस्था में बदलाव का सीधा असर राज्य के वित्तीय हितों पर पड़ सकता है।
हेमंत सोरेन का कहना है कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों की राय को कानून बनाने की प्रक्रिया में पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए था।
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ सकता है टकराव
नए खनिज कानून को लेकर हेमंत सोरेन का विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड और केंद्र के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद पहले से मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि झारखंड सरकार इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि संवैधानिक और कानूनी रास्तों का भी इस्तेमाल करेगी।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा जारी रहेगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हेमंत ने पीएम मोदी से भी की पुनर्विचार की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी विधेयक पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि नए कानून का प्रभाव झारखंड के आदिवासी और कमजोर वर्गों पर पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पर राज्य की आपत्तियों को किस तरह लेती है और क्या कानून के प्रावधानों को लेकर झारखंड सरकार की चिंताओं पर कोई बातचीत होती है।
फिलहाल छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन ने खनिज कानून को झारखंड की राजनीति का नया बड़ा मुद्दा बना दिया है। केंद्र और राज्य के बीच इस मुद्दे पर टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं।
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