अररिया: अररिया जिले की महलगांव थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर जाली भारतीय मुद्रा (FICN) के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस पूरी कार्रवाई में सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह हुआ है कि जाली नोटों का यह कारोबार कोई और नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुना गया एक वार्ड सदस्य ही चला रहा था।
500 रुपये के 434 जाली नोट बरामद
एसपी जितेंद्र कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम इसरवा स्थित बरडेंगा कामत में जाली नोटों के सौदे की गुप्त सूचना मिली थी। थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तुरंत छापेमारी की। पुलिस को देखकर भाग रहे तस्कर मोहम्मद पनाउल्लाह उर्फ मोहम्मद पनबुल (36 वर्ष) को खदेड़कर दबोच लिया गया, जबकि उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से 500-500 रुपये मूल्य के 434 जाली नोट (कुल ₹2,17,000) और एक ओप्पो मोबाइल फोन जब्त किया गया।
सिलीगुड़ी से जुड़ा है तस्करी का तार
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने कबूल किया कि वह जाली नोटों की यह खेप पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से लेकर आया था। पकड़ा गया आरोपी चौकता पंचायत के एक वार्ड का निर्वाचित सदस्य है। उसका पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है और वर्ष 2019 में चोरी के एक मामले (कांड संख्या 208/19) में भी उसकी संलिप्तता पाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में कांड संख्या 194/26 दर्ज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सिंडिकेट के बैकवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस
एसपी ने कहा कि जाली नोट देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की खून-पसीने की कमाई के लिए बड़ा खतरा हैं। फिलहाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि सिलीगुड़ी से यह जाली नोट किसके माध्यम से अररिया तक पहुंचे और इस सिंडिकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं। सफल छापेमारी करने वाली पुलिस टीम को एसपी द्वारा प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
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