लखीसराय: जिस शख़्स ने पूरी ज़िंदगी शिक्षा, ईमानदारी और सादगी के नाम कर दी—आज वही नाम सिर्फ यादों में रह गया। अराजपत्रित प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष और जिले के वरिष्ठ शिक्षाविद हंसराज यादव का रविवार देर रात लखीसराय के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही चानन से लेकर पूरे लखीसराय तक शोक की लहर दौड़ गई।
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चानन प्रखंड के बड़ारे गांव निवासी हंसराज यादव ने मध्य विद्यालय लाखोचक समेत जिले के कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वे सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि शिक्षकों की आवाज़ और समाज के भरोसेमंद स्तंभ माने जाते थे।
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सोमवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बड़ारे पहुंचा, श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। शुभचिंतक, शिक्षक, समाजसेवी, राजनीतिक कार्यकर्ता—हर आंख नम थी। ईमानदार छवि, कर्तव्यनिष्ठ जीवन और मृदुभाषी स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले हंसराज यादव को लोगों ने नम आंखों से अंतिम प्रणाम किया।
स्वर्गीय हंसराज यादव की अंतिम इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पटना जिले के बाढ़ (उमानाथ) स्थित गंगा घाट पर किया जाएगा। शवयात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ा। ढोल-बाजे, घोड़ा-हाथी और फूलों की बारिश के बीच गांव ने अपने प्रिय शिक्षक को अंतिम विदाई दी।
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इस मौके पर उनके पुत्र प्रो. जय प्रकाश यादव, उमेश, हाकिम, वीरेश यादव, सुबोध, सतेंद्र और परिजनों के साथ-साथ चानन व लखीसराय क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
शवयात्रा में राजद नेता प्रेम सागर चौधरी, शैलेंद्र सिंह यादव, प्राथमिक शिक्षक नेता राम टहल पासवान, पूर्व मुखिया विशुनदेव यादव, शिक्षक ज्योति किरण, अध्यक्ष कुमार ब्रजेश, कवि व युवा साहित्यकार सुरेश प्रसाद यादव समेत कई पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
हंसराज यादव चले गए, लेकिन शिक्षा और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनकर हमेशा जीवित रहेगा।
