हाजीपुर से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां गांव स्तर से मेंटल हेल्थ को लेकर एक नई पहल शुरू हुई है। बासुदेवपुर चपुता स्थित रूरल ग्लोबल कैपाबिलिटी सेंटर में विज़न इंडिया द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस ट्रेन द ट्रेनर्स” कार्यक्रम के दूसरे दिन जिलाधिकारी वर्षा सिंह शामिल हुईं।
इस दौरान डीएम वर्षा सिंह ने कहा कि देश की प्रगति के लिए महिलाओं का सशक्त होना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मेंटल हेल्थ को अक्सर लोग मजाक में लेते हैं, जबकि यह बेहद गंभीर विषय है। समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभी भी लोग खुलकर अपनी मानसिक समस्याएं साझा नहीं कर पाते।

डीएम ने कहा कि बिहार के युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन और मेंटरिंग की है। अगर उन्हें सही दिशा मिले तो वे देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने विज़न इंडिया और इसके प्रबंध निदेशक विवेक कुमार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम में मौजूद हाजीपुर विधायक अवधेश कुमार सिंह ने भी इस पहल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं हैं और कई बार अपनी समस्याएं इसलिए साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें मजाक का डर रहता है। हालांकि अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

इस मौके पर डीएम ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों और हुनरमंद लोगों को सशक्त किया जा रहा है। साथ ही जीविका से जुड़ी महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, जो देश की प्रगति के लिए अहम है।
कार्यक्रम के आयोजक और विज़न इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि इस ट्रेनिंग का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का समूह तैयार करना है, जो आगे चलकर गांव-गांव, स्कूल और कॉलेजों में मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता फैलाएं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मानसिक थकावट एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, इसलिए योग, ध्यान और तनाव प्रबंधन जैसे उपाय बेहद जरूरी हो गए हैं।

तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से आए अनुभवी प्रशिक्षक प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और समग्र वेलनेस के व्यावहारिक तरीके सिखा रहे हैं। इस पहल के जरिए खासतौर पर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यहां सिर्फ रोजगार या कौशल की बात नहीं हो रही, बल्कि “मन की सेहत” को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। यही वजह है कि यह पहल अब गांवों में एक नई सामाजिक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
ये खबर भी पढ़े: Bihar News : दो अंकों से जीता नेपाल, बिहार की टीम से रोमांचक भिड़ंत में दिखा दम!