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शेखपुरा में डॉक्टरों की हड़ताल; चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था

सदर अस्पताल के एसीएमओ और अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि यह बहिष्कार बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के निर्देशानुसार किया जा रहा है। आंदोलन की मुख्य वजह कुछ जिलों में डॉक्टरों के वेतन को बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर रोकना बताया जा रहा है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को इस बहिष्कार से अलग रखा गया है ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।

बिहार के सरकारी अस्पतालों में 27 से 29 मार्च तक ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर राज्यभर के डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। शेखपुरा सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने भी इस आंदोलन में शामिल होकर ओपीडी सेवाओं से दूरी बना ली है।

डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें सुरक्षा की गारंटी, सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए उचित आवास की व्यवस्था, अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति और डॉक्टरों की कार्य अवधि का निर्धारण शामिल है।

ओपीडी सेवाएं बंद होने से हजारों मरीजों को दिक्कत होगी। खासकर वे मरीज, जो साधारण बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल आते हैं, उन्हें बिना उपचार लौटना पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को ज्यादा परेशानी होगी।

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया हो। पहले भी बायोमेट्रिक हाजिरी और अन्य मुद्दों को लेकर डॉक्टरों ने विरोध किया है। इस बार भी डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

ओपीडी सेवाएं ठप होने से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है कि मरीजों की समस्या का समाधान कैसे किया जाए और डॉक्टरों की मांगों पर संतुलित निर्णय कैसे लिया जाए। अब देखना होगा कि सरकार और डॉक्टरों के बीच यह विवाद कब और कैसे सुलझता है।

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