दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र का हरिनगर गांव इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। वजह—एक ऐसा मामला, जिसने पूरे गांव को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मजदूरी के बकाया पैसों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR तक पहुंच गया है, जिसमें गांव के ब्राह्मण समाज के 70 लोगों को नामजद और 100–150 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब तक 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
शिकायतकर्ता असर्फी पासवान का आरोप है कि वर्षों पुराने मजदूरी विवाद को लेकर उनके परिवार के साथ मारपीट की गई, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग हुआ और घर में घुसकर हमला किया गया। उनका कहना है कि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई। इस शिकायत के बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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हालांकि पुलिस प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहा है। बिरौली DSP के अनुसार, यह मामला मूल रूप से लेन-देन से जुड़ा पुराना विवाद है, जिसे बाद में जातीय रंग देने की कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात फिलहाल नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है। इस बीच कुछ सामाजिक संगठनों और NGO ने FIR की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नामजद किए गए कई लोग गांव में रहते ही नहीं हैं।

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हरिनगर की यह घटना अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रही। यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या हर विवाद को जाति के चश्मे से देखा जाना चाहिए, या फिर सच्चाई तक पहुंचने के लिए संतुलित जांच ज्यादा जरूरी है। जवाब अब प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के हाथ में है।