बिहार विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें राजद विधायक कुमार सर्वजीत के बयान ने माहौल को और गरमा दिया। उन्होंने सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में बड़ी-बड़ी सड़कें अडाणी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों से बनवाई जा रही हैं, जबकि महिलाओं को रोजगार के नाम पर बकरी, सूअर और मुर्गी पालन के लिए पैसे दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे बिहार में इसलिए पैदा नहीं हुए कि 10-10 हजार रुपये लेकर पशुपालन करें, बल्कि सरकार लोगों को बड़े स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर दे।

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इस बयान के बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने जवाब देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में चरवाहा स्कूल खोले गए थे और गरीबों के घरों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि आज गांव-गांव में सड़कें बनी हैं और लोगों के घरों में बिजली पहुंची है। मुख्यमंत्री की योजनाओं से लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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सदन की कार्यवाही के दौरान अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने बढ़ते अपराध, महिला सुरक्षा और ड्रग्स की समस्या को लेकर सरकार को घेरा। नेपाल और यूपी बॉर्डर से शराब और ड्रग्स की तस्करी का मुद्दा उठाया गया, जिस पर मंत्री ने कहा कि सरकार पहले से चेकपोस्ट के जरिए निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर सख्ती बढ़ाई जाएगी।
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विधान परिषद में भी तीखी बहस देखने को मिली। अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कुछ योजनाओं में 205 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार ने जांच कराने की बात कही। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि स्टेट नोडल अकाउंट नहीं बनने के कारण अटकी होने की जानकारी भी सामने आई।
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सदन के बाहर विपक्षी दलों ने बढ़ते अपराध और अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी की। राजद विधायकों ने सरकार पर जाति आधारित कार्रवाई का आरोप लगाया, जबकि जदयू नेताओं ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और कानून अपना काम करेगा। कुल मिलाकर, बजट सत्र का सातवां दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और गरमागरम बहस के बीच बीता, जिससे आने वाले दिनों में सियासी माहौल और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।