लखीसराय: बच्चों का बचपन सुरक्षित रहे, वे अपने अधिकारों को पहचानें और किसी भी असहज परिस्थिति में बिना डरे अपनी बात रख सकें—इसी उद्देश्य से जिले में चलाए जा रहे ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का शनिवार को समापन हुआ। 25 से 31 अक्टूबर 2026 तक चले इस अभियान के तहत डेफोडिल पब्लिक स्कूल के अलावा डीएवी, संत जोन्स सहित अन्य सरकारी विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, सुरक्षा और कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
अभियान के समापन अवसर पर पचना रोड स्थित शिवपुरी मुहल्ला के डेफोडिल पब्लिक स्कूल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला जज के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश-7 मुकेश कुमार मिश्र तथा पैनल अधिवक्ता रोहिणी दास ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने सरल भाषा में बच्चों को बताया कि सुरक्षा से जुड़े अधिकारों की जानकारी होना हर बच्चे के लिए जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बिना किसी डर के मदद मांग सकें।

POCSO कानून से लेकर बाल विवाह तक की दी गई जानकारी
पैनल अधिवक्ता रोहिणी दास ने विद्यार्थियों को POCSO अधिनियम-2012 के प्रावधानों और इसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार या असहज परिस्थिति को छिपाना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए।
कार्यक्रम में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी नहीं कराने, शिक्षा के महत्व, बाल विवाह की रोकथाम, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन सहायता सेवाओं के बारे में भी बताया गया। वक्ताओं ने बच्चों को समझाया कि पढ़ाई उनका अधिकार है और उन्हें किसी भी तरह के शोषण या दबाव के सामने चुप रहने की जरूरत नहीं है।
गुड टच-बैड टच समझाकर बताया, असहज महसूस होने पर चुप न रहें
जागरूकता कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुड टच और बैड टच की जानकारी देना रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि किसी का व्यवहार उन्हें असहज महसूस कराए या कोई अनुचित हरकत करे, तो डरकर चुप रहने के बजाय तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि उनकी सुरक्षा और उनकी बात दोनों महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य अतिथि एडीजे मुकेश कुमार मिश्र ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को ऐसा सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे अपनी परेशानी बिना किसी भय के बता सकें और उनकी बात को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी परेशानी में सहायता मांगने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय प्रबंधन ने अतिथियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम की शुरुआत में डेफोडिल पब्लिक स्कूल के निदेशक धर्मेंद्र कुमार आर्य एवं संस्थापिका सुधा आर्य ने मुख्य अतिथि सहित उपस्थित पत्रकारों को मोमेंटो, चादर और पौधा भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पीएलवी अजय कुमार यादव एवं पेशकार पवन कुमार आर्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
अभियान के जरिए जिले के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों तक सुरक्षा, शिक्षा और कानूनी अधिकारों से जुड़ा संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को यह समझाया गया कि जागरूकता ही सुरक्षित बचपन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ये खबर भी पढ़े: 3 साल तक पेट में छिपा रहा ‘पत्थर का बच्चा’; CT स्कैन में दिखा कंकाल, ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाला!
