लखीसराय: युवाओं में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता से जोड़ने के उद्देश्य से राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (GEC), लखीसराय में ‘स्टार्टअप-बैंक कनेक्ट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज के स्टार्टअप सेल की ओर से स्टार्टअप बिहार और बिहार सरकार के उद्योग विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बैंकिंग संस्थानों, जिला उद्योग केंद्र, नाबार्ड और कॉर्पोरेट क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उभरते उद्यमियों को बैंकिंग सुविधाओं, ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया, क्रेडिट गारंटी योजनाओं और कारोबार विस्तार के लिए उपलब्ध वित्तीय विकल्पों की जानकारी देना था। इस दौरान विद्यार्थियों और स्टार्टअप संस्थापकों को अपने व्यावसायिक विचारों को सफल उद्यम में बदलने के लिए वित्तीय योजना और संस्थागत सहयोग के महत्व से अवगत कराया गया।
अच्छे आइडिया के साथ वित्तीय संसाधन भी जरूरी: प्राचार्य
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजू एम. तुगनायत ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी नवाचार को सफल व्यावसायिक मॉडल में बदलने के लिए केवल अच्छा विचार होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उचित मार्गदर्शन, वित्तीय संसाधन और संस्थागत सहयोग भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का स्टार्टअप सेल विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार सृजक बनाने की दिशा में प्रयासरत है। ऐसे कार्यक्रम तकनीकी प्रतिभाओं और वित्तीय संस्थानों के बीच संपर्क मजबूत करते हैं तथा युवाओं को उद्यम शुरू करने के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर देते हैं।
रेजरपे राइज के विशेषज्ञों ने बताईं स्टार्टअप सुविधाएं
कार्यक्रम में रेजरपे के सीनियर डायरेक्टर निपुण जैन और अभिनव श्रीवास्तव ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने ‘Razorpay Rize’ कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट, कंपनी पंजीकरण, क्रेडिट और तकनीकी टूल्स जैसी सुविधाओं से किस प्रकार सहायता मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने स्टार्टअप्स के लिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों के महत्व पर भी चर्चा की। इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग कारोबार के संचालन और विस्तार को आसान बनाने में सहायक हो सकता है।
जिला उद्योग केंद्र ने सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
जिला उद्योग केंद्र, लखीसराय के प्रभारी महाप्रबंधक रूपेश कुमार झा ने उद्यमिता विकास, सरकारी सहायता योजनाओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध राज्य एवं केंद्र सरकार के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने उद्यमियों को अपने व्यवसाय का औपचारिक पंजीकरण कराने, जरूरी दस्तावेज तैयार रखने और पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि सही जानकारी और नियोजित प्रक्रिया के माध्यम से उद्यमी वित्तीय सहायता के विभिन्न विकल्पों तक पहुंच सकते हैं।
नाबार्ड ने ग्रामीण और कृषि आधारित स्टार्टअप्स पर दिया जोर
नाबार्ड के डीडीएम विभोर कुमार ने ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित कारोबार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि तकनीक (एग्री-टेक), ग्रामीण उद्यमिता और सूक्ष्म उद्योगों के विकास में नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप व्यावसायिक मॉडल विकसित करने के महत्व पर भी चर्चा की।
बैंक ऋण, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और क्रेडिट गारंटी पर चर्चा
कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों और प्रतिनिधियों ने स्टार्टअप्स को ऋण आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, आवश्यक दस्तावेजों और वित्तीय अनुशासन के बारे में बताया।
इस दौरान भारत सरकार की Credit Guarantee Scheme for Startups (CGSS) पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने क्रेडिट गारंटी व्यवस्था की भूमिका समझाई, जिसके माध्यम से पात्र स्टार्टअप्स के लिए ऋण उपलब्ध कराने में वित्तीय संस्थानों को गारंटी संबंधी सहायता मिल सकती है। हालांकि, ऋण की स्वीकृति संबंधित योजना के नियमों, पात्रता और बैंक के मूल्यांकन पर निर्भर करती है।
स्टार्टअप सेल ने नवाचार को वित्तपोषण से जोड़ने पर दिया जोर
महाविद्यालय के स्टार्टअप सेल के नोडल पदाधिकारी प्रो. रणधीर कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए परिसर में उद्यमिता के अनुकूल माहौल तैयार करने और नवाचार को संस्थागत सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वहीं, स्टार्टअप सेल लखीसराय के जिला स्टार्टअप समन्वयक चंदन कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘स्टार्टअप-बैंक कनेक्ट’ का उद्देश्य नए व्यावसायिक विचारों और वित्तीय संसाधनों के बीच की दूरी कम करना है, ताकि अच्छे विचार पूंजी की कमी के कारण आगे बढ़ने से न रुकें।

सवाल-जवाब सत्र में छात्रों ने विशेषज्ञों से किया संवाद
कार्यक्रम के इंटरएक्टिव सत्र में छात्र उद्यमियों और स्टार्टअप संस्थापकों ने बैंक प्रतिनिधियों तथा कॉर्पोरेट विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे। चर्चा के प्रमुख विषयों में व्यावसायिक मॉडल, ऋण पात्रता, डिजिटल भुगतान, पूंजी निवेश और कारोबार विस्तार शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए वित्तीय तैयारी और योजनाबद्ध तरीके से कारोबार शुरू करने के महत्व को समझाया।
कार्यक्रम का समापन “Connect. Finance. Grow.” के मूल मंत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने बिहार में मजबूत, नवाचार-आधारित और आत्मनिर्भर स्टार्टअप इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।
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