गया: बिहार के गया में जमीन विवाद को लेकर हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है। चंदौती थाना क्षेत्र के गांधीनगर मोहल्ले में 50 से अधिक नकाबपोश बदमाशों द्वारा एक घर को निशाना बनाकर बमबाजी, फायरिंग और पथराव किए जाने का आरोप है। दिनदहाड़े हुई इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना के दौरान घर के बाहर रखी कुर्सियों और अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचाया गया। वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस आरोपियों की पहचान में जुट गई है।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि निजी जमीन पर निर्माण कार्य कराने को लेकर विवाद चल रहा था और उनसे रंगदारी की मांग की जा रही थी। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि दूसरे पक्ष के लोग जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
50 से ज्यादा नकाबपोश बदमाशों के पहुंचने का दावा
मिली जानकारी के अनुसार, गांधीनगर निवासी सत्येंद्र नारायण के घर को कथित तौर पर निशाना बनाया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि बड़ी संख्या में नकाबपोश लोग अचानक वहां पहुंचे और हमला शुरू कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर कुछ लोग हाथों में डंडे लेकर घर की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। खबर के मुताबिक, हमलावरों ने बम फोड़े, फायरिंग की और ईंट-पत्थर भी चलाए। घर के बाहर रखी कुर्सियों को भी तोड़ दिया गया।
रिपोर्ट में तीन से चार बम फोड़े जाने की बात कही गई है। घटना के बाद आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया। हालांकि, हमले में कितने लोग घायल हुए या गोली किसी को लगी या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
निजी जमीन पर निर्माण को लेकर चल रहा था विवाद
पीड़ित सत्येंद्र नारायण और मुन्ना कुमार के मुताबिक, वे अपनी निजी जमीन पर निर्माण कार्य करा रहे थे। उनका आरोप है कि महावीर पासवान के बेटों की ओर से कई एकड़ जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था।
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य कराने के बदले रंगदारी की मांग की जा रही थी और जमीन पर दूसरे पक्ष की ओर से अपना दावा किया जा रहा था। इसी विवाद के बीच हमले की घटना हुई।
फिलहाल, जमीन के स्वामित्व, कथित रंगदारी और हमले में शामिल लोगों की भूमिका से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही निकाला जा सकता है।
कोर्ट और अंचल कार्यालय के फैसले का भी दिया हवाला
पीड़ित पक्ष का दावा है कि जमीन विवाद को लेकर कोर्ट और अंचल कार्यालय में हुई कार्रवाई उनके पक्ष में रही है। उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय थानाध्यक्ष को आवेदन देने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया था।
पीड़ितों के मुताबिक, शनिवार सुबह भी जमीन को लेकर विवाद हुआ था। उनका दावा है कि पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को शाम में थाने बुलाया गया था। लेकिन आरोप है कि इससे पहले ही दोपहर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और हमला कर दिया।
इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित आदेशों, शिकायतों और पुलिस रिकॉर्ड की जांच अहम होगी।
CCTV फुटेज में दिखे संदिग्ध, पहचान में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलने पर चंदौती थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार, एसआई शिवनाथ कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
फुटेज में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और घटना में उनकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हमले में कितने लोग शामिल थे और बमबाजी तथा फायरिंग के आरोपों से जुड़े साक्ष्य क्या हैं।
जमीन विवाद में बमबाजी और फायरिंग से सुरक्षा पर सवाल
गांधीनगर की इस घटना ने जमीन विवादों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि जमीन पर निर्माण को लेकर पहले से विवाद और शिकायतें थीं, तो जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित अधिकारियों को कब-कब सूचना दी गई और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता घटना के तथ्यों की पुष्टि, संदिग्धों की पहचान और कानूनी कार्रवाई करना है। पीड़ित पक्ष ने जमीन पर कब्जे और रंगदारी की मांग के आरोप लगाए हैं, जबकि मामले के सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गया के गांधीनगर में हुई इस घटना में अब CCTV फुटेज, जमीन से जुड़े दस्तावेज और दोनों पक्षों के बयान अहम माने जा रहे हैं। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि हमले की पूरी साजिश क्या थी और इसमें कौन-कौन शामिल थे।
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