भागलपुर: शहर को जाम से राहत दिलाने और यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 191 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अब इसी स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था की खामियां आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। भागलपुर के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल और डिस्प्ले स्क्रीन के ठीक से काम नहीं करने की शिकायतें सामने आई हैं। कहीं सिग्नल पर लगातार पीली लाइट जल रही है, तो कहीं ट्रैफिक लाइट बंद रहने से वाहन चालकों को यह समझने में परेशानी हो रही है कि उन्हें रुकना चाहिए या आगे बढ़ना चाहिए।
सबसे गंभीर शिकायत ऑनलाइन चालान को लेकर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तकनीकी खराबी के बीच चौराहे से गुजरने पर भी उनका चालान कट रहा है। इससे वाहन चालकों में नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब ट्रैफिक सिग्नल ही सही ढंग से काम नहीं कर रहे, तो ऐसी स्थिति में डिजिटल कैमरों से चालान काटने की प्रक्रिया कितनी उचित है?
स्टेशन चौक, मनाली चौक, तिलकामांझी चौक और कोतवाली क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं ने स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार ने भरोसा दिया है कि खराब ट्रैफिक लाइटों को दुरुस्त कराया जाएगा।
191 करोड़ की व्यवस्था, लेकिन चौराहों पर परेशानी
भागलपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यातायात को व्यवस्थित करने के लिए आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल, कैमरे और डिस्प्ले स्क्रीन जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। इनका उद्देश्य चौराहों पर जाम कम करना, यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और वाहन चालकों को स्पष्ट संकेत देना था।
लेकिन स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई प्रमुख चौराहों पर उपकरणों के काम नहीं करने की शिकायतें सामने आई हैं। कहीं ट्रैफिक लाइट की समस्या है, तो कहीं डिस्प्ले स्क्रीन पर उपयोगी जानकारी नहीं दिखने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आधुनिक यातायात व्यवस्था के लिए खर्च की गई बड़ी राशि के अनुरूप रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था क्यों सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
पीली लाइट के कारण असमंजस, फिर ऑनलाइन चालान की शिकायत
ट्रैफिक सिग्नल पर पीली लाइट जलने का उद्देश्य वाहन चालकों को सावधान करना होता है। लेकिन यदि सिग्नल लंबे समय तक केवल पीली लाइट दिखाता रहे या उसका संचालन सामान्य क्रम में न हो, तो वाहन चालकों के सामने असमंजस की स्थिति बन सकती है।
स्थानीय निवासी ने बताया कि मनाली चौक पर ट्रैफिक लाइट करीब 10 मिनट तक पीली जलती रही। काफी देर इंतजार करने के बाद जब वह आगे बढ़े, तो उनके मुताबिक यातायात नियम तोड़ने के आरोप में ऑनलाइन चालान कट गया।
इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद लोग मांग कर रहे हैं कि तकनीकी रूप से खराब सिग्नल और कैमरों की तत्काल जांच की जाए। साथ ही, जिन चालानों को गलत तरीके से काटे जाने की शिकायत है, उनकी समीक्षा कराई जाए।
हालांकि, किसी विशेष चालान को गलत ठहराने के लिए संबंधित सिग्नल की स्थिति, कैमरे के रिकॉर्ड और चालान के विवरण की जांच जरूरी होगी।
स्टेशन चौक से कोतवाली तक यातायात व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, मनाली चौक के अलावा स्टेशन चौक और कोतवाली क्षेत्र में भी ट्रैफिक सिग्नल के ठीक से काम नहीं करने की शिकायतें हैं। व्यस्त समय में यदि सिग्नल बंद हो जाएं या स्पष्ट संकेत न दें, तो अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के बीच टकराव और जाम का खतरा बढ़ सकता है।
तिलकामांझी चौक पर भी ट्रैफिक लाइट की समस्या सामने आई थी। ट्रैफिक डीएसपी के मुताबिक, वहां सिग्नल को ठीक करा दिया गया है। अन्य स्थानों पर भी व्यवस्था दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया गया है।
इन चौराहों पर यातायात का दबाव अधिक रहने के कारण सिग्नल की खराबी का असर केवल वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों और आसपास के दुकानदारों पर भी पड़ सकता है।
विक्रमशिला सेतु से आने वाले वाहनों का दबाव बढ़ाता है चुनौती
भागलपुर में विक्रमशिला सेतु की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव भी यातायात प्रबंधन के लिए चुनौती माना जाता है। भारी वाहनों और शहर के भीतर चलने वाले दूसरे वाहनों को व्यवस्थित तरीके से निकालने के लिए स्पष्ट सिग्नल व्यवस्था और पर्याप्त यातायात नियंत्रण जरूरी है।
यदि व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक लाइट काम नहीं करती, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों और होमगार्ड जवानों पर वाहनों को नियंत्रित करने का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में जाम और वाहन चालकों के बीच विवाद की आशंका भी बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक सिग्नल की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि तकनीकी खराबी के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
खराब कैमरे और डिस्प्ले स्क्रीन के रखरखाव पर भी सवाल
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए कैमरों और डिस्प्ले स्क्रीन को यातायात निगरानी और सूचना देने की व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया था। लेकिन स्थानीय रिपोर्ट में कुछ डिस्प्ले स्क्रीन के उपयोगी जानकारी नहीं दिखाने और उपकरणों के रखरखाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
नागरिकों का कहना है कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य केवल नियम तोड़ने वालों पर नजर रखना या चालान काटना नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल चौराहों पर यातायात सुचारू रखने, दुर्घटनाओं की आशंका कम करने और लोगों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए भी किया जाना चाहिए।
यदि किसी उपकरण में तकनीकी खराबी है, तो उसकी पहचान कर समय पर मरम्मत करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी है। साथ ही, चालान से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए भी सरल और पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए।
नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन के तालमेल पर सवाल
स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि स्मार्ट सिटी से जुड़ी सुविधाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियों के बीच कितना समन्वय है।
लोगों की मांग है कि संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन चौराहों पर सिग्नल खराब हैं, मरम्मत की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है और शिकायत मिलने के बाद कितने समय में सुधार किया जाएगा।
191 करोड़ रुपये की परियोजना का उद्देश्य शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाना था। इसलिए नागरिक चाहते हैं कि खर्च की गई राशि के अनुरूप यातायात व्यवस्था का संचालन और रखरखाव भी प्रभावी हो।
लोगों की मांग—तकनीकी खराबी वाले चालानों की हो समीक्षा
ट्रैफिक सिग्नल में गड़बड़ी की शिकायतों के बीच स्थानीय लोगों ने मांग की है कि खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। जिन वाहन चालकों का दावा है कि तकनीकी खराबी के कारण उनका गलत चालान कटा है, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
लोगों का यह भी कहना है कि वाहन चालकों को चालान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और उसका जवाब पाने की स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए। इससे गलतफहमी और आर्थिक परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सभी ऑटोमैटिक चालानों पर रोक लगाने या पुराने चालानों को रद्द करने के संबंध में कोई निर्णय घोषित होने की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
ट्रैफिक डीएसपी का आश्वासन—जल्द दुरुस्त होंगी लाइटें
मामले पर ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार ने कहा कि कुछ जगहों पर ट्रैफिक लाइट खराब होने की जानकारी मिली है। उनके अनुसार, तिलकामांझी चौक की लाइट ठीक करा दी गई है और बाकी चौराहों पर भी जल्द मरम्मत कराई जाएगी।
यह आश्वासन ऐसे समय आया है, जब वाहन चालक सिग्नल की स्थिति और ऑनलाइन चालान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब यह देखना होगा कि बाकी चौराहों पर व्यवस्था कितनी जल्दी दुरुस्त होती है और तकनीकी खराबी से जुड़ी शिकायतों का समाधान कैसे किया जाता है।
बड़ा सवाल: स्मार्ट सिटी का फायदा आम जनता को कब मिलेगा?
भागलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ा यह मामला केवल खराब लाइटों तक सीमित नहीं है। यह महंगी शहरी परियोजनाओं के रखरखाव, विभागीय जवाबदेही और नागरिकों की शिकायतों के समय पर समाधान का भी सवाल है।
191 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नियमित रूप से काम करेंगे, जाम की समस्या कम होगी और ऑनलाइन चालान की प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मरम्मत का आश्वासन दिया गया है। अब आम लोगों की नजर इस बात पर है कि यह आश्वासन जमीन पर कब उतरता है और खराब सिग्नल के कारण हो रही परेशानियों से उन्हें कब राहत मिलती है।