गया: पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को रूस की पांच महिला श्रद्धालु फल्गु नदी स्थित देवघाट पहुंचीं। भारतीय परंपरा के अनुरूप सनातनी वेशभूषा में जमीन पर बैठकर उन्होंने पुरोहितों के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना की और अपने पितरों के लिए पिंडदान किया।
विदेशी महिलाओं को भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार कर्मकांड करते देख देवघाट पर मौजूद लोग भी कुछ देर के लिए ठहर गए। यह दृश्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।

जुलाई में गया आई थीं, फिर लिया पिंडदान का फैसला
गया इस्कॉन मंदिर के पुजारी जगदीश श्याम दास के अनुसार, जुलाई में रूस से कुछ विदेशी पर्यटक गया आए थे। इस दौरान वे इस्कॉन मंदिर पहुंचे, जहां उन्हें गया की धार्मिक महत्ता और पिंडदान की प्राचीन परंपरा के बारे में बताया गया। पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड और इसके धार्मिक महत्व को जानने के बाद रूस की इन महिलाओं ने अपने पूर्वजों के लिए गया में पिंडदान करने का निर्णय लिया।

पर्यटन से आगे बढ़ रही विदेशी श्रद्धालुओं की रुचि
इस्कॉन से जुड़े लोगों के मुताबिक, विदेशी श्रद्धालुओं की दिलचस्पी अब सिर्फ गया घूमने तक सीमित नहीं है। वे यहां की धार्मिक मान्यताओं, तर्पण और पिंडदान जैसी सदियों पुरानी परंपराओं को समझने और करीब से अनुभव करने में भी रुचि दिखा रहे हैं।
इस पितृपक्ष में ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और अफ्रीका समेत कई देशों से आए विदेशी श्रद्धालु भी पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो चुके हैं।
देवघाट पर रूस की पांच महिलाओं का पिंडदान इस बात की खास तस्वीर बन गया कि आस्था की भाषा सरहदों से कहीं आगे जाती है।
ये खबर भी पढ़े: मुजफ्फरपुर में लॉ का छात्र बना हथियार तस्करी का आरोपी; किराए के कमरे से कट्टा, कारतूस और चोरी की बाइक बरामद!