मुजफ्फरपुर: मोतीझील के श्यामनंदन रोड में पकड़े गए फर्जी आधार सेंटर मामले की जांच में पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरपुर में संचालित फर्जी सेंटर पर पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित आधार सेंटर में काम करने वाले कर्मी शिवकुमार पंडित का लॉगिन और पासवर्ड मिला। इसी लॉगिन के जरिए कथित तौर पर फर्जी तरीके से आधार बनाए जा रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, लॉगिन चालू करने पर OTP शिवकुमार पंडित के मोबाइल नंबर पर आता था। आरोप है कि वह फोन के जरिए OTP फर्जी सेंटर संचालक को उपलब्ध कराता था। इसके बाद फर्जी सेंटर पर आधार बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।
तीन साल से चल रहा था खेल?
पुलिस जांच में यह बात सामने आने की जानकारी दी गई है कि उक्त लॉगिन का इस्तेमाल करीब तीन साल से किया जा रहा था। इस आधार पर जांच एजेंसी को सैकड़ों फर्जी आधार बनाए जाने का अंदेशा है।
नगर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मंगलवार रात फर्जी सेंटर पर छापेमारी की थी। मौके से लैपटॉप, फिंगरप्रिंट रीडर, आधार और राशन कार्ड समेत कई दस्तावेज जब्त किए गए।
पटना के संबंधित आधार सेंटर कर्मी शिवकुमार पंडित को भी छपरा से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
फर्जी आधार से विदेशी नागरिकों के दस्तावेज?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह आशंका सामने आई है कि फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराने में किया गया हो सकता है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में सक्रिय एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
हालांकि, विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने और पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका है, इसकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
गृह मंत्रालय के अलर्ट के बीच खुलासा
पुलिस के अनुसार, गृह मंत्रालय पहले ही नेपाल सीमा से सटे जिलों में फर्जी आधार बनाने वाले गिरोह को लेकर अलर्ट जारी कर चुका है। मुजफ्फरपुर में इससे पहले भी इसी तरह के नेटवर्क से जुड़े दो अन्य फर्जी आधार सेंटर पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
अब पुलिस पटना स्थित एजेंसी से भी आधार सेंटर कर्मी और उसके लॉगिन से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि इस लॉगिन से कितने आधार बनाए गए, किन लोगों के दस्तावेज इस्तेमाल हुए और क्या इन आधार कार्डों का इस्तेमाल पासपोर्ट या अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने में हुआ।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। अगर सैकड़ों फर्जी आधार बनने की आशंका सही साबित होती है, तो यह मामला केवल एक फर्जी सेंटर तक सीमित न रहकर बड़े दस्तावेजी नेटवर्क का रूप ले सकता है।
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