बक्सर: बिहार के लौरिया से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री विनय बिहारी ने बक्सर में अपनी ही पार्टी और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव के दौरान लोगों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जाने, सरकार के कर्ज और विकास के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को लेकर सवाल किया। उनके बयान की स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
विनय बिहारी ने कहा कि यदि सरकार विकास योजनाओं पर काम कर रही थी और उसका असर दिखाई दे रहा था, तो चुनाव के समय लोगों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सरकार पर बढ़ते कर्ज के संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि कर्ज लेकर विकास करने की नीति के साथ भविष्य में वित्तीय संसाधनों की चुनौती भी देखनी होगी। यह टिप्पणी उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान की।
पार्टी को लेकर भी कही अपनी बात
विधायक ने भाजपा को अपने लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी के भीतर कुछ गलत दिखाई देने पर सवाल उठाना भी जरूरी है। उन्होंने अपने बयान के राजनीतिक परिणाम को लेकर भी आशंका जताई। उनके मुताबिक, कम बोलने पर वोट और ज्यादा बोलने पर टिकट प्रभावित होने की स्थिति हो सकती है।
बक्सर भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन ने उनके बयान को लेकर कहा कि विनय बिहारी कभी-कभी भावनाओं में आकर बोलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक कई मौकों पर NDA सरकार की उपलब्धियों की सराहना करते रहे हैं।
बक्सर के विकास पर भी सवाल
विनय बिहारी ने बक्सर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए सरकार की वित्तीय क्षमता और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया।
इसके अलावा उन्होंने राजनीति में उम्र सीमा, जनप्रतिनिधियों के वेतन-पेंशन और जेल में बंद लोगों के चुनाव लड़ने जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने राजनीति में नई पीढ़ी को अवसर देने के लिए उम्र सीमा पर विचार करने की बात कही।
रोजगार और सरकारी व्यवस्था पर भी टिप्पणी
विधायक ने युवाओं के रोजगार और अवसरों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि युवाओं को पर्याप्त रोजगार और अवसर नहीं मिलने पर असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने NGO कर्मचारियों के वेतन और भुगतान व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए तथा इसमें कथित अंतर की जांच की जरूरत बताई।
विनय बिहारी इससे पहले भी शराबबंदी, सड़क निर्माण और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। बक्सर में उनके ताजा बयान के बाद चुनावी समय में आर्थिक सहायता, सरकारी कर्ज, विकास के लिए वित्तीय संसाधन और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बहस फिर तेज हुई है।
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