गया: बिहार की राजनीति में महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) को लेकर नया विवाद सामने आया है। बोधगया विधायक और विरोधी दल के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत ने बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महाबोधि मंदिर जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल के प्रबंधन को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सरकार चाहती है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों को BTMC में सचिव और सदस्य के पदों पर जगह मिले।
गुरुवार को जहानाबाद सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार सर्वजीत ने BTMC कमेटी के गठन में हो रही देरी, मंदिर परिसर की व्यवस्था, धार्मिक स्थलों पर राजनीति और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, RSS से जुड़े लोगों की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
चार महीने से कमेटी का गठन नहीं, मंदिर प्रबंधन पर सवाल
कुमार सर्वजीत ने कहा कि BTMC की कमेटी भंग हुए करीब चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सदस्यों और सचिव की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि बोधगया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां विभिन्न देशों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और पर्यटन सीजन भी शुरू हो चुका है।
ऐसे में मंदिर प्रबंधन समिति का गठन नहीं होना चिंता का विषय है। विधायक ने सवाल उठाया कि जब मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, तो उसकी व्यवस्था, साफ-सफाई और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के लिए स्थायी समिति अब तक क्यों नहीं बनाई गई?
महाबोधि मंदिर पर RSS की नजर होने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि महाबोधि मंदिर जैसे पवित्र धार्मिक स्थल पर भी RSS की नजर है। उनके मुताबिक, सरकार चाहती है कि RSS से जुड़े लोगों को BTMC में सचिव और सदस्य बनाया जाए।
विधायक ने कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को मंदिर की साफ-सफाई, चढ़ावे और प्रबंधन जैसे जरूरी मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने के बजाय उनकी व्यवस्था बेहतर करने पर काम होना चाहिए।
मंदिर परिसर में कपड़े सुखाने का भी उठाया मुद्दा
कुमार सर्वजीत ने मंदिर परिसर की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि महाबोधि मंदिर में करीब 350 सुरक्षा बल तैनात हैं। इसके बावजूद परिसर में तालाब के पास महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों के कपड़े सुखाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल की छवि प्रभावित हो सकती है। विधायक ने मंदिर परिसर की व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत बताई।
FCRA और 80 लाख रुपये के जुर्माने का दावा
BTMC के गठन में देरी को लेकर विधायक ने विदेशी श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महाबोधि मंदिर में विदेशों से आने वाले श्रद्धालु दान देते हैं। ऐसे में समिति का गठन नहीं होने से विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी FCRA से संबंधित परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
कुमार सर्वजीत ने दावा किया कि पिछली बार FCRA कोड रद्द होने के कारण BTMC को 80 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ा था। इस दावे और मौजूदा FCRA स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
मोहन भागवत के बयान पर भी साधा निशाना
विधायक ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान की निंदा करते हुए कहा कि देश की तरक्की के लिए सभी धर्मों के लोगों का मिल-जुलकर रहना जरूरी है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी सरकार आने के बाद हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा बढ़ी है।
कुमार सर्वजीत ने यह भी आरोप लगाया कि देश में नफरत फैलाने वाले लोग ही दूसरों पर देश को बांटने की साजिश करने का आरोप लगाते हैं। SIR के खिलाफ आंदोलन करने वालों को जेल भेजे जाने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
10 हजार रुपये बांटने के आरोप से लेकर स्कूलों की व्यवस्था तक घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार सर्वजीत ने सरकार पर 10 हजार रुपये देकर वोट खरीदने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समय निकाली गई सड़क निर्माण की निविदाओं को रद्द किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे नीतीश कुमार का अपमान हो रहा है।
विधायक ने दलित उत्पीड़न और सरकारी स्कूलों में शौचालय की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि शौचालय की कमी के कारण 90 प्रतिशत छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ दी है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री से BTMC गठन की मांग
कुमार सर्वजीत ने मुख्यमंत्री से मांग की कि धर्म को राजनीति से दूर रखा जाए और BTMC का गठन जल्द किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल बोधगया के चौराहों का दौरा करने से पर्यटन स्थल का विकास नहीं होगा। इसके लिए ठोस योजनाओं, बेहतर प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं पर काम करना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि BTMC की नई कमेटी का गठन कब होगा और महाबोधि मंदिर के प्रबंधन को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार क्या जवाब देती है। फिलहाल RSS से जुड़े लोगों की नियुक्ति के आरोप और अन्य राजनीतिक दावों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
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