बेगूसराय: बरौनी सुधा डेयरी में खरीद, टेंडर, नियुक्ति, कर्ज, दूध के हिसाब और संपत्तियों के इस्तेमाल से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर फुलवड़िया थाने में डेयरी के पूर्व प्रभारी एमडी सह सहायक महाप्रबंधक रविंद्र प्रसाद और वर्तमान चेयरमैन विजय शंकर सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने ऑडिट रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 27 फरवरी 2026 के बीच डेयरी की विभिन्न गतिविधियों की पड़ताल की गई। जांच टीम ने 1,311 पन्नों की छह मुख्य फाइलों समेत कई दस्तावेजों की समीक्षा की। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया, खरीद, भुगतान, नियुक्तियों और डेयरी की संपत्तियों के इस्तेमाल में नियमों के उल्लंघन के कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
खरीद और डिलीवरी के रिकॉर्ड पर भी सवाल
जांच में तीन Apple iPad की खरीद और उनकी डिलीवरी के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। रिपोर्ट में दर्ज वाहन नंबर की जांच के दौरान उसके ट्रक के बजाय ट्रैक्टर से संबंधित होने की बात सामने आने का उल्लेख है। इसी तरह अधिकारियों के एक दौरे से जुड़े रिकॉर्ड में दूरी और भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
वनस्पति तेल और गेहूं के आटे की खरीद में एक ही फर्म से कोटेशन लेने तथा खरीद आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर भी जांच रिपोर्ट में आपत्ति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कोटेशन की तारीख और उसे स्वीकार करने की तारीख में भी विसंगति पाई गई।
लैपटॉप के इस्तेमाल को लेकर जांच
डेयरी के खर्च से खरीदे गए एक Apple लैपटॉप को लेकर भी जांच में सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खरीद से पहले आवश्यक मंजूरी का रिकॉर्ड नहीं मिला। तकनीकी जांच में लैपटॉप का लॉगिन किसी डेयरी अधिकारी या कर्मचारी से संबद्ध नहीं पाया गया और बाहरी व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए जाने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।
दूध के हिसाब में 14 करोड़ से अधिक का अंतर
जांच रिपोर्ट में डेयरी के दूध और दुग्ध उत्पादों से जुड़े हिसाब-किताब की भी समीक्षा की गई। इसमें 14.30 करोड़ रुपये से अधिक के हैंडलिंग लॉस का उल्लेख है। जांच टीम ने रिकॉर्ड में दर्ज नुकसान और वास्तविक नुकसान के बीच अंतर होने की बात कही है। इस मामले में आगे फॉरेंसिक ऑडिट कराए जाने की बात सामने आई है।
रिश्तेदारों के वाहनों और नियुक्तियों पर आरोप
रिपोर्ट में चेयरमैन के बेटे को नियमों के विपरीत सुधा उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूटर एजेंसी दिए जाने का आरोप भी दर्ज है। इसके अलावा चेयरमैन और मार्केटिंग अधिकारी के रिश्तेदारों की निजी गाड़ियों को बिना टेंडर प्रक्रिया के डेयरी में किराए पर लगाने का उल्लेख किया गया है।
पूर्व प्रभारी एमडी रविंद्र प्रसाद की ओर से बोर्ड की मंजूरी, विज्ञापन और चयन समिति के बिना नियुक्तियां किए जाने का भी आरोप जांच रिपोर्ट में लगाया गया है। कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन भुगतान को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
110 करोड़ से अधिक के कर्ज की भी जांच
जांच रिपोर्ट के अनुसार, बरौनी डेयरी ने निदेशक मंडल की पूर्व मंजूरी के बिना विभिन्न बैंकों से 110 करोड़ रुपये से अधिक का ओवरड्राफ्ट लिया। मिल्क पाउडर की बिक्री में भी तय दर और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच अंतर का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।
इसके अलावा 10 लाख रुपये से अधिक के कई सौदों में ई-टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाने, बड़े ऑर्डर को छोटे हिस्सों में बांटने, बाजार दर से अधिक कीमत पर कुछ सामान खरीदने और बिना पर्याप्त दस्तावेजों के भुगतान किए जाने जैसे आरोपों की भी जांच की गई है।
अब फॉरेंसिक जांच पर नजर
मामले में पुलिस 14.30 करोड़ रुपये के कथित हैंडलिंग लॉस, 110 करोड़ रुपये से अधिक के ओवरड्राफ्ट और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। लैपटॉप, iPad, कंप्यूटर, गेट रजिस्टर, CCTV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच भी प्रस्तावित है।
एफआईआर में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, संपत्तियों के कथित दुरुपयोग, दस्तावेजों में हेरफेर और वित्तीय नुकसान से जुड़े आरोप दर्ज किए गए हैं। फिलहाल इन आरोपों की पुलिस जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
ये खबर भी पढ़े: बिहार में बुलेट ट्रेन की तैयारी तेज, पटना से दिल्ली 4 घंटे 41 मिनट में पहुंचने का अनुमान!