पटना: नेपाल की बाढ़ का मलबा अब बिहार की नदियों में पहुंच रहा है। और उसके साथ बहकर आ रही हैं गोइता, थाई मांगुर और बराली जैसी विशाल व खतरनाक मछलियां। इनमें से कुछ का वजन 60 से 100 किलो तक बताया जा रहा है, जो लगभग हाथी के नवजात बच्चे के बराबर है। मछुआरों का दावा है कि ये इंसानों को भी निगल सकती हैं।
29 अगस्त को गोपालगंज के मंगलपुर घाट पर मछुआरों ने गंडक नदी से दर्जनों बड़ी मछलियां पकड़ीं। कुछ का वजन 40-45 किलो, तो एक का 60 किलो तक था। मछुआरे इन्हें पश्चिम बंगाल के बाजारों में बेचने के लिए भेज रहे हैं। बिहार मत्स्य निदेशालय ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के पानी से आई मछलियों को बिना जांच के न खाएं।
गोइता : ‘नदी का शैतान’
इसे आदमखोर कैटफिश भी कहा जाता है। शरीर लंबा, सिर चौड़ा और नुकीले दांत। नेपाल की काली नदी में पहले भी कई लोगों के पानी में खिंच जाने की घटनाएं दर्ज हैं। एनिमल प्लैनेट के प्रसिद्ध शो ‘River Monsters’ में भी इसका जिक्र हुआ था। भारत में इसके खाने-बेचने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे संकटग्रस्त माना गया है।
थाई मांगुर : प्रतिबंधित और खतरनाक
यह मछली तेजी से बढ़ती है और मांसाहारी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने साल 2000 में इसके पालन, बिक्री और खाने पर रोक लगा दी थी। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें आर्सेनिक, मर्करी और लेड जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारी का कारण बन सकते हैं।
बराली : मीठे पानी की शिकारी
45-50 किलो तक वजन वाली यह मछली बाजार में अपनी मांग रखती है। मुलायम मांस और कम कांटे होने के कारण लोग इसे पसंद करते हैं। इसके खाने-बेचने पर कोई रोक नहीं है।
मत्स्य विभाग की सलाह साफ है — बाढ़ के पानी से आई मछलियों को सावधानी से ही खरीदें। बिना जांच के खाना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है।
ये खबर भी पढ़े: नेपाल आपदा: बाढ़ में दबे एक घर से 23 शव बरामद, तीर्थयात्रियों के होने की आशंका!