शेखपुरा: सड़क पर घुटने भर गंदा पानी और उससे उठती बदबू… शिकायतें कई बार, लेकिन समाधान नहीं। आखिरकार भदेली गांव के ग्रामीणों ने ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पूरे प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जलजमाव से परेशान ग्रामीणों ने सड़क को ही धान का खेत बना दिया और मुख्य सड़क पर धान की रोपनी कर अनोखे अंदाज में विरोध जताया।
शेखपुरा सदर प्रखंड के भदेली गांव में पिछले करीब तीन वर्षों से नाले का गंदा और बदबूदार पानी मुख्य सड़क पर बह रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। घुटने भर पानी के बीच लोगों को आवाजाही करनी पड़ती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने सुबह सड़क पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते शेखपुरा-निमि पथ पर धान की रोपनी शुरू कर दी गई। ग्रामीणों का कहना था कि जब सड़क पर सालों से पानी जमा है तो इसे सड़क नहीं, खेत ही समझ लिया जाए।
सड़क बनी धान का खेत, थम गई रफ्तार
ग्रामीणों के प्रदर्शन के कारण शेखपुरा-निमि पथ पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई और कई घंटों तक यातायात ठप रहा। प्रदर्शन के जरिए ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार जलजमाव की समस्या दूर कराने की मांग की गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ दिन पहले जिलाधिकारी भी इसी रास्ते से गुजरे थे, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
निजी जमीन बनी जल निकासी में अड़चन
मामले की सूचना मिलने पर कुसुम्भा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। थानाध्यक्ष अमरेश कुमार ने बताया कि सड़क के दोनों तरफ नाला बना हुआ है, लेकिन जहां से पानी की निकासी होनी थी, वह निजी जमीन है। जमीन मालिक द्वारा पानी बहाने से रोक लगाए जाने के कारण जल निकासी की समस्या बनी हुई है।
आश्वासन के बाद खत्म हुआ जाम
पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि नाले का विस्तार कर पानी को दूसरे बड़े नाले में गिराने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही जर्जर सड़क की मरम्मत और जल निकासी की समस्या दूर करने का भी आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर सड़क से जाम हटा लिया।
हालांकि ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आश्वासन के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा सड़क पर उतरेंगे और इस बार आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
ग्रामीणों का संदेश साफ था—जब सड़क पर पानी सालों तक जमा रहे, तो विरोध भी ऐसा हो कि प्रशासन की नजर उस पर पड़े।
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