पटना: त्योहारों से पहले बिहार में चीनी की कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महज एक सप्ताह में खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 40 प्रतिशत तक बढ़कर 50 से 70 रुपये किलो पहुंच गए हैं। थोक बाजार में भी पिछले एक महीने में करीब 1600 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
चीनी के बढ़ते दामों ने जहां गृहणियों और आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है, वहीं मिठाई और खाद्य कारोबारियों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है। खासकर त्योहारों के मौसम में मिठाइयों के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है।
‘मिठास’ महंगी हुई तो सरकार के मंत्री ने दे दिया अलग ही तर्क
चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के बीच बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के बयान ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
उन्होंने कहा कि लोगों ने चीनी खाना कम कर दिया है और चीनी खाने से शुगर होता है। इसलिए चीनी की कीमत बढ़ने का कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
वहीं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अगर चीनी की कीमत बढ़ती है तो इससे किसानों को फायदा होगा और किसानों को फायदा होने से उन्हें खुशी होगी।
मंत्रियों के इन बयानों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
RJD का हमला- गरीब की जेब पर पड़ रहा असर, मंत्री दे रहे ज्ञान
आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि चीनी की बढ़ती कीमत का असर आम गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। उन्होंने मंत्रियों के बयानों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि जिन लोगों की आमदनी ज्यादा है, उनके लिए कीमत बढ़ना शायद बड़ी समस्या नहीं हो, लेकिन गरीब परिवारों के घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ता है।
विपक्ष का सवाल है कि जब चीनी 50 से सीधे 70 रुपये किलो हो रही है, तब सरकार महंगाई रोकने के बजाय लोगों को चीनी कम खाने की सलाह क्यों दे रही है?
एक महीने में 1600 रुपये प्रति क्विंटल महंगी
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में करीब एक महीने पहले थोक बाजार में चीनी लगभग 4,800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी। अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 6,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
खुदरा बाजार में भी एक सप्ताह के भीतर करीब 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
किराना कारोबारियों का कहना है कि अचानक कीमत बढ़ने से ग्राहक भी कम मात्रा में चीनी खरीद रहे हैं।
त्योहार में मिठाई होगी महंगी?
चीनी की कीमत बढ़ने का सबसे सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ सकता है। बिहार राज्य खाद्य व्यवसायी संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता के मुताबिक चीनी महंगी होने से मिठाइयों की लागत बढ़ रही है। त्योहारों के दौरान जब मिठाइयों की मांग बढ़ती है, तब इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।
यानी इस बार त्योहारों की मिठास पर महंगाई का स्वाद भारी पड़ सकता है।
सरकार ने कालाबाजारी पर सख्ती के दिए निर्देश
बढ़ती कीमतों के बीच बिहार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। सरकार ने बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक रखने वाले कारोबारियों की जांच के आदेश दिए हैं।
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, समस्तीपुर और सीतामढ़ी के जिलाधिकारियों तथा चीनी मिल संचालकों से स्टॉक का सत्यापन कराने को कहा गया है।
सरकार का दावा है कि राज्य की चीनी मिलों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
तो फिर चीनी इतनी महंगी क्यों?
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने कीमत बढ़ने के पीछे कई संभावित कारण बताए हैं। इनमें बाजार में शॉर्टेज, कालाबाजारी और गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में बढ़ना शामिल है।
इसके अलावा चीनी के आयात और आयात शुल्क से जुड़ी नीतियों का भी बाजार पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
हालांकि कारोबारियों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि आखिर अचानक कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों हुई।
चीनी के साथ गुड़ भी महंगा
महंगाई का असर सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। गुड़ की कीमत भी बढ़ी है। करीब एक महीने पहले 55-60 रुपये किलो मिलने वाला गुड़ अब 70-80 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
यानी चाय में चीनी डालें या गुड़ का इस्तेमाल करें, दोनों ही विकल्प अब पहले से महंगे हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल
जब रसोई में चीनी 70 रुपये किलो पहुंच रही है, त्योहार सामने हैं और मिठाई महंगी होने की आशंका है—तो सरकार महंगाई रोकने पर फोकस करेगी या लोगों को ‘चीनी कम खाने’ की सलाह देकर जिम्मेदारी से बचती रहेगी?
फिलहाल सरकार ने स्टॉक जांच और कालाबाजारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि इन कदमों से बाजार में चीनी के दाम वास्तव में नीचे आते हैं या त्योहारों से पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ता है।
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