आरा/पटना: बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा फैसला लिया है। न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देने और एक परिजन को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान को सरकार की ओर से मामले में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। कुछ सप्ताह पहले भरत तिवारी का परिवार मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय की मांग कर चुका था। इसके बाद से सरकार लगातार मामले की निगरानी कर रही है और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
भरत तिवारी की 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी। घटना के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। परिजनों का आरोप था कि भरत तिवारी ने हथियार डाल दिए थे, बावजूद इसके उन पर गोली चलाई गई। मामले ने तूल पकड़ा तो राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया।
जांच के दौरान भरत तिवारी के माता-पिता, भाई और अन्य परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं मामले में कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर में शामिल एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही हैं।
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है। हालांकि परिजनों की मांगें अभी इससे कहीं आगे हैं। परिवार दोषी अधिकारियों की गिरफ्तारी, भरत तिवारी को शहीद का दर्जा, एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, गांव में उनकी प्रतिमा स्थापित करने और गांव का नाम उनके नाम पर रखने की मांग कर रहा है।
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
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