नालंदा: बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पर उस वक्त एक ऐसा मंजर बना, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। ये कोई फिल्म का सीन नहीं था, बल्कि हकीकत में ज़िंदगी अपने सबसे नाटकीय अंदाज़ में सामने थी—जहां एक मां ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, वो भी दो अलग-अलग जगहों पर… पहला चलती ट्रेन में और दूसरा प्लेटफॉर्म पर।
दिल्ली से अपने गांव लौट रही सिम्पू देवी, अपने पति दशरथ के साथ श्रमजीवी एक्सप्रेस में सफर कर रही थीं। दशरथ दिल्ली में मजदूरी करता है और पत्नी को सुरक्षित घर पहुंचाने की कोशिश में था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। यात्रा के बीच अचानक सिम्पू देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
ट्रेन में मौजूद कुछ यात्रियों ने हिम्मत दिखाई और हालात संभाले। देखते ही देखते, चलती ट्रेन में एक बेटे ने जन्म लिया। माहौल संभल पाता, इससे पहले ही ट्रेन बिहारशरीफ स्टेशन पहुंच गई—और यहीं कहानी ने दूसरा मोड़ लिया।
प्लेटफॉर्म पर उतारते ही दर्द फिर तेज हुआ… और कुछ ही पलों में सिम्पू देवी ने एक बेटी को जन्म दे दिया। स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई, लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ तमाशबीन बने रहे।
इसी भीड़ में किन्नर समाज के कुछ लोग आगे आए—बिना हिचक, बिना देरी। उन्होंने मां और दोनों नवजातों को संभाला, कपड़े और मदद का इंतजाम किया, एंबुलेंस बुलवाई और तीनों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। राहत की बात ये है कि मां और नवजात बेटा पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन बेटी की हालत अभी नाजुक बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है।
इस पूरी घटना ने दो तस्वीरें साफ कर दीं—एक, भीड़ की खामोशी… और दूसरी, किन्नर समाज की इंसानियत। जहां लोग सिर्फ वीडियो बना रहे थे, वहीं कुछ लोग जिंदगी बचाने में लगे थे।
ये कहानी सिर्फ एक जन्म की नहीं, बल्कि उस सच की है—जहां इंसानियत आज भी जिंदा है, बस उसे निभाने वाले कम हैं।
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