लोहरदगा: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) लोहरदगा ने मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन आहट” के तहत बुधवार को बड़ी सफलता हासिल की। टीम ने स्टेशन परिसर से दो मानव तस्करों को गिरफ्तार कर चार नाबालिग बालिकाओं को सकुशल बचा लिया।
घटना 5 अगस्त 2026 की दोपहर की है, जब आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली कि कुछ नाबालिग बच्चियों को अवैध रोजगार का झांसा देकर दूसरे राज्य ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही आरपीएफ टीम सक्रिय हुई और स्टेशन पर निगरानी बढ़ा दी गई।
फुटओवर ब्रिज पर घेराबंदी, संदिग्धों को दबोचा
लोहरदगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 स्थित फुटओवर ब्रिज के पास एक व्यक्ति बच्चियों के साथ संदिग्ध स्थिति में दिखा। टीम ने बिना देर किए घेराबंदी कर दो लोगों को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नंदकुमार वी. (47 वर्ष), कोयंबटूर (तमिलनाडु) और बिनीता कुमारी (28 वर्ष), गुमला (झारखंड) के रूप में हुई है।
नौकरी का लालच, असल में तस्करी का जाल
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बच्चियों को अधिक वेतन का लालच देकर तमिलनाडु के एक वस्त्र उद्योग में काम दिलाने के नाम पर ले जा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि किसी भी बच्ची के पास आरक्षित टिकट नहीं था, सभी सामान्य टिकट पर यात्रा कर रही थीं, जिससे पूरे मामले पर शक और गहरा गया।
समय रहते कार्रवाई, टली बड़ी घटना
आरपीएफ ने इसे मानव तस्करी का गंभीर मामला मानते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई की। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और चारों बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।
इसके बाद आरोपियों, पीड़ित बच्चियों और संबंधित दस्तावेजों को आगे की कार्रवाई के लिए मानव तस्करी निरोधक इकाई को सौंप दिया गया।
टीम की सतर्कता बनी ‘ढाल’
इस अभियान में उपनिरीक्षक सुदर्शन पिंग, एएसआई धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, महिला प्रधान आरक्षी कल्पना कुमारी समेत अन्य जवानों की अहम भूमिका रही।
उनकी सतर्कता और तेजी से की गई कार्रवाई ने चार मासूम जिंदगियों को तस्करी के जाल में फंसने से बचा लिया।
इलाके में चर्चा, ‘सही समय पर सही एक्शन’
इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा है कि अगर थोड़ी भी देर होती, तो बच्चियों को दूसरे राज्य ले जाया जा सकता था।
वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी टीम की सराहना करते हुए इसे मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी कामयाबी बताया है।
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