मुजफ्फरपुर: बिहार की सियासत में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने राजद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा ईमेल के माध्यम से पार्टी नेतृत्व को भेज दिया। अब सोमवार को वे अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामेंगे।
मुजफ्फरपुर के चांदनी चौक स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने राजद छोड़ने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी में काम करने का मौजूदा तरीका उन्हें स्वीकार्य नहीं था, इसलिए उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
“जनता के विकास के लिए लिया फैसला”
अर्जुन राय ने कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने सीतामढ़ी के विकास को लेकर कई सपने देखे थे, लेकिन वे पूरी तरह पूरे नहीं हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य में एनडीए की डबल इंजन सरकार के साथ जुड़कर क्षेत्र के लंबित विकास कार्यों को गति दी जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का मूल उद्देश्य हमेशा जनता की उम्मीदों को पूरा करना रहा है और भाजपा के मंच से वह इसे और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा पाएंगे।
पीएम मोदी और भाजपा नेतृत्व की सराहना
पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और बिहार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया और बिहार में पंचायत चुनाव से पहले प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का भी स्वागत किया।
छात्र राजनीति से संसद तक का सफर
अर्जुन राय का राजनीतिक सफर वर्ष 1994 में बिहार विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वर्ष 2000 में उन्होंने राजद के टिकट पर औराई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2005 में वह जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए और औराई से विधायक निर्वाचित हुए।
बाद में उन्होंने सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजद प्रत्याशी के रूप में सीतामढ़ी से चुनाव लड़ा था।
राजद के लिए बढ़ी चुनौती
राजद नेता मृत्युंजय तिवारी के बाद अर्जुन राय का पार्टी छोड़ना राजद के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव के दौरान हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि अर्जुन राय के भाजपा में शामिल होने के बाद बिहार की राजनीतिक समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।
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