गया: कभी कॉपियों में नंबर कम आने पर जिंदगी कड़वी लगती थी, अब सिस्टम पर सवाल उठे तो आंदोलन भी कड़वा हो गया। लेकिन जैसे ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आया, गया में माहौल अचानक ‘मेलोडी’ हो गया—और वो भी सचमुच वाला!
यहां छात्रों और कुछ राजनीतिक समर्थकों ने मिठाई नहीं, बल्कि मेलोडी चॉकलेट बांटकर जीत का जश्न मनाया। अब ये जश्न सिर्फ मीठा नहीं था, थोड़ा “ट्रेंडिंग” भी था—क्योंकि हाल ही में यही मेलोडी चॉकलेट प्रधानमंत्री के गिफ्ट पैक में भी चर्चा में आ चुकी है।
छात्र संगठन आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। उनका कहना था कि “हमने आवाज उठाई, सिस्टम ने देर से सही, लेकिन सुनी।” हालांकि, तंज भी साफ झलक रहा था—“अगर पहले ही सुन लेते, तो इतना लंबा ‘कड़वा’ सफर तय नहीं करना पड़ता।”
वहीं, कॉकरोज जनता पार्टी के समर्थकों ने गांधी मैदान में मेलोडी बांटते हुए जैसे एक नया राजनीतिक संदेश दे दिया—अब विरोध भी ‘स्वीट’ तरीके से होगा!
छात्र नेताओं ने कहा कि यह जश्न किसी की हार का नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे की वापसी का है। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि नया शिक्षा मंत्री कम से कम इतना ध्यान रखे कि अगली बार छात्रों को अपनी जीत के लिए चॉकलेट नहीं, सिर्फ रिजल्ट का इंतजार करना पड़े।
गया का यह ‘मेलोडी जश्न’ अब चर्चा में है—जहां सिस्टम की कड़वाहट के बाद राजनीति और आंदोलन दोनों ने मिलकर एक मीठा, थोड़ा व्यंग्य भरा संदेश दे दिया।