किशनगंज: कहते हैं दुनिया में मां से बड़ा कोई योद्धा नहीं होता। जब बात अपने बच्चे की जिंदगी पर आ जाए तो एक मां अपने डर, दर्द और अपनी जान तक को पीछे छोड़ देती है। पूर्णिया के एक छोटे से गांव से सामने आई यह कहानी मां की उसी अद्भुत ममता और हिम्मत की मिसाल बन गई है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं।
रौटा थाना क्षेत्र के बौलान प्याजी गांव में एक मां अपने 18 वर्षीय बेटे शहजाद आलम की जिंदगी बचाने के लिए मौत से भी लड़ गई। शुक्रवार सुबह शहजाद अपनी मां शहजादी के साथ मवेशियों के लिए चारा लेने गांव के पास बांध पर गया था। तभी अचानक एक जहरीले सांप ने शहजाद को डस लिया।
कुछ देर तक बेटे को भी इसका अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन जब उसने पास में सांप को देखा तो उसके होश उड़ गए। उसने कांपती आवाज में अपनी मां को पूरी बात बताई। बेटे के मुंह से सांप के काटने की बात सुनते ही मां शहजादी का कलेजा कांप उठा, लेकिन अगले ही पल मां की ममता ने डर को हरा दिया।
उस पल मां के सामने सिर्फ एक ही लक्ष्य था—किसी भी कीमत पर बेटे की जिंदगी बचानी है। उसने बिना देर किए बेटे को संभाला और मदद के लिए प्रयास शुरू कर दिया। बेटे की हालत बिगड़ती देख मां खुद अपनी जान की परवाह करना भूल गई।
कुछ ही देर में मां और बेटे दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। मां की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दोनों को आनन-फानन में किशनगंज सदर अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टर दोनों की जिंदगी बचाने में जुट गए। चिकित्सक डॉ. कृष्णानंद तीर्थांकर ने बताया कि फिलहाल मां-बेटे की हालत स्थिर है और दोनों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लेकिन अस्पताल का सबसे भावुक दृश्य वह था, जब खुद इलाज करा रही मां बार-बार डॉक्टरों से अपने बेटे के बारे में पूछ रही थी। उसके चेहरे पर अपनी तकलीफ नहीं, बल्कि बेटे की चिंता दिखाई दे रही थी।
गांव वालों के लिए यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि मां के उस प्यार की कहानी है जो किसी भी खतरे से बड़ा होता है। शहजादी ने साबित कर दिया कि मां की ममता के सामने डर भी हार जाता है और हिम्मत की कोई सीमा नहीं होती।
आज पूरा गांव इस मां के जज्बे को सलाम कर रहा है।
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