किशनगंज: सरहदें सिर्फ नक्शे पर होती हैं… रिश्तों में नहीं। भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की एक तस्वीर अब किशनगंज में देखने को मिल रही है। नेपाल से शादी कर भारत आईं कई महिलाएं वर्षों से यहां अपने परिवार के साथ रह रही हैं, लेकिन भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण कई सरकारी सुविधाओं और अधिकारों से दूर हैं।
अब ऐसी महिलाओं के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किशनगंज जिले के सभी सात प्रखंडों में 8, 15 और 22 जुलाई को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में नेपाल से विवाह कर आई महिलाओं को नागरिकता आवेदन की पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी और दस्तावेज तैयार करने से लेकर ऑनलाइन आवेदन तक में मदद की जाएगी।
सीमा से सटे ठाकुरगंज, दिघलबैंक और टेढ़ागाछ जैसे इलाकों में ऐसी महिलाओं की संख्या अधिक है। कई महिलाएं वर्षों पहले शादी के बाद भारत आईं, यहीं परिवार बसाया, बच्चे हुए और जीवन का बड़ा हिस्सा यहीं गुजर गया। लेकिन जानकारी की कमी और कागजी प्रक्रिया की उलझनों के कारण वे अब तक नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकीं।
हाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसी महिलाओं के नाम सूची से हटने के बाद यह मामला सामने आया। इसके बाद प्रशासन ने महसूस किया कि बड़ी संख्या में महिलाओं को नागरिकता कानून और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी देने की जरूरत है।
जिलाधिकारी नवीन कुमार के अनुसार, भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 5(1)(C) के तहत विदेशी महिला पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं।
इन महिलाओं को आवेदन के लिए भारत में सात साल के वैध निवास का प्रमाण, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, पति के भारतीय नागरिक होने का प्रमाण, पासपोर्ट, रेसिडेंशियल परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे।
किशनगंज के अलावा बिहार के कई सीमावर्ती जिलों में नेपाल से विवाह कर आई महिलाएं रहती हैं। अररिया, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, मधुबनी और सीतामढ़ी जैसे जिलों में भी ऐसी महिलाओं की संख्या है।
लेकिन सबसे ज्यादा संख्या किशनगंज और अररिया जैसे भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में बताई जाती है।
अब इन विशेष शिविरों से उम्मीद जगी है कि वर्षों से पहचान और अधिकार की प्रतीक्षा कर रहीं इन महिलाओं को भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया में नई राह मिलेगी।
क्योंकि यह सिर्फ एक दस्तावेज का मामला नहीं… बल्कि उन महिलाओं की पहचान और अधिकार से जुड़ा सवाल है, जिन्होंने शादी के बाद भारत को ही अपना घर बना लिया।
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