पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पर एक के बाद एक नए आरोप सामने आ रहे हैं। दो वोटर कार्ड और जन्मतिथि में गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब उनके शैक्षणिक विवरण में भी कथित विसंगति उजागर हुई है।
Sheikhpura : शेखपुरा में गूंजेगा देशभक्ति का स्वर, आज निकलेगी भव्य तिरंगा यात्रा
जानकारी के अनुसार, 2010 के विधानसभा चुनाव में दाखिल किए गए हलफनामे में विजय कुमार सिन्हा ने अपनी इंजीनियरिंग (डिप्लोमा) की उत्तीर्णता का वर्ष 1987 बताया था। वहीं, 2020 के चुनावी हलफनामे में यही डिप्लोमा 1989 में पूर्ण करने का उल्लेख है। यह अंतर सिर्फ संदेह ही नहीं, बल्कि एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर एक ही कोर्स की दो अलग-अलग उत्तीर्णता तिथियां क्यों बताई गईं?
Politics : क्या चुनाव में हुआ है वोटों का बड़ा खेल? राहुल गांधी के आरोप से हिल गया पूरा सिस्टम?
राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से गरमाता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह मामला सिर्फ तारीख़ों की गड़बड़ी नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई ‘सूचना में हेरफेर’ है। उनका कहना है कि नाम, वोटर कार्ड और शैक्षणिक योग्यता—तीनों जगह बार-बार सामने आ रहे ये अंतर संयोग नहीं हो सकते।
Sheikhpura : 50 हज़ार से ज़्यादा श्रद्धालु… भोलेनाथ का ऐसा दरबार आपने नहीं देखा होगा!
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि हलफनामे में दी गई जानकारी झूठी या भ्रामक पाई जाती है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है। Crime : शेखपुरा में गैंगस्टर स्टाइल अपहरण – पेट्रोल खत्म हुआ, जिंदगी बच गई!
वहीं, विजय कुमार सिन्हा की ओर से अब तक इस नए आरोप पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जनता के बीच यह सवाल तेज़ी से गूंज रहा है—“उत्तीर्णता वर्ष अलग-अलग क्यों? और इस बार का सच क्या है?”
Bhagalpur : बोल्डर थे या बबलगम? गंगा के सामने बिखर गया 6 करोड़ का दंभ!
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अब सिर्फ़ एक तकनीकी विसंगति का मामला नहीं, बल्कि नेता की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल बन चुका है।